255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 118

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विधानसभा, कार्यकारी मंडल और न्याय मंडल राज्य संविधान द्वारा निर्मित और राज्य के अधीन हैं।’’

प्रस्तावित भारतीय संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। भारत का कोई भी राज्य (हर हाल में भाग 1 के) अपना संविधान निर्माण नहीं कर सकता। केंद्र और राज्यों का एक ही संविधान है और कोई राज्य इससे अपने को मुक्त नहीं रख सकता। उसी घेरे में रह कर उन्हें कार्य करना होगा।

अब तक मैंने अमेरिका के संघराज्य और भारतीय संघराज्य इनमें क्या अंतर है इस ओर आपका ध्यान दिलाया। प्रस्तावित भारतीय संघराज्य के कुछ अन्य लक्षण भी हैं। उनके कारण केवल अमेरिकन संघराज्य का ही नहीं वरन् अन्य संघराज्यों से उनका अलग होना स्पष्ट होता है। अमेरिका के अलावा अन्य सभी संघराज्य पद्धतियां संघराज्य के तय सांचों में बद्ध हैं। किसी हालत में वे अपना आकार और प्रकार बदल नहीं सकते। कभी भी वे एकसंघ रूप धारण नहीं कर सकते। लेकिन मसौदा संविधान समय और परिस्थितियों की जरूरत के अनुसार केंद्रीय तथा संघराज्य - दोनों रूप धारण कर सकता है। इस प्रकार उसकी रचना की गई है कि सामान्य स्थितियों में वह संघराज्य के रूप में काम करेगा लेकिन युद्ध की स्थितियों में वह केंद्रीभूत तरीके से काम करेगा। अनुच्छेद 275 के प्रावधानों के मुताबिक राष्ट्रपति को बहाल किए गए अधिकारों में उन्होंने घोषणा-पत्र जारी किया कि पूरे राज्य की तस्वीर ही बदल जाएगी और राज्य का केंद्रीभूत राज्य में परिवर्तन होगा। इस घोषणा के अनुसार केंद्र सरकार निम्नांकित अधिकार हासिल कर सकती है (1) राज्यसूची के विषयों सहित अन्य किसी भी विषय में कानून बनाने का अधिकार। (2) राज्यों के अधिकार में आने वाले विषयों के बारे में प्राप्त कार्यकारी सत्ता का उपयोग राज्य कैसे करें इस बारे में मार्गदर्शन करने का अधिकार। (3) किसी भी अधिकारी को किसी भी उद्देश्य के साथ सत्ता सौंपने का अधिकार और (4) संविधान के आर्थिक प्रबंधों के स्थगन का अधिकार - किसी भी संघराज्य को इस प्रकार केंद्रीभूत राज्य में परिवर्तन करने का अधिकार नहीं। प्रस्तावित मसौदा संविधान के संघराज्य और अपने को ज्ञात अन्य सभी संघराज्यों के बीच का भेद यह एक महत्वपूर्णमुद्दा है।

प्रस्तावित भारतीय संघराज्य में और अन्य संघराज्यों में केवल इतना ही फर्क नहीं है। संघप्रणाली में अगर प्रशासन प्रभावशाली न हो तो उसे कमजोर माना जा सकता है। संघराज्य पद्धति की समीक्षा करते हुए कहा जाता है कि - उसे दो तरह की कमजोरियों का सामना करना पड़ता है - कठोरता और कानूनी स्वरूप। संघराज्य प्रणाली अर्थात् federal system के यह दो मूलभूत दोष हैं इसमें दो राय नहीं हो सकती। संघराज्य का संविधान अनिवार्यतः लिखित रूप में होता है और लिखित संविधान में निश्चित रूप से कठोरता होती है। संघराज्य का संविधान अर्थात् संविधान के कानून के अनुसार केंद्र अथवा राज्य सरकारों के बीच सार्वभौमिकत्व का विभाजन। इसके अपरिहार्य रूप से दो परिणाम होते हैं -1) राज्यों को दिए गए क्षेत्रों में केंद्र द्वारा किसी क्षेत्र में हस्तक्षेप किया जाना या इसके खिलाफ हो तो उससे