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295 14-7-1952 सार्वजनिक फंड का सही उपयोग करें 269 296 20-7-1952 क्या शिक्षित युवा समाज की उन्नति के लिए कुछ करेंगे? 273 297 17-8-1952 संघर्ष के सहारे मैंने अछूतों में ज्वलंत स्वाभिमान जगाया है 275 298 28-9-1952 सार्वजनिक धन के गलत इस्तेमाल जैसा नीच कृत्य कोई 278

और नहीं

299 15-12-1952 विश्वविद्यालयों में भावी जीवन का निर्माण होता है। इस बारे में

छात्रों में सजगता होना जरूरी है 281 300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें 284 301 25-12-1952 हक पाने के लिए महिलाएं अपने मन की दुर्बलता को त्याग

कर, कमर कस कर आगे आएं 297 302 25-12-1952 राजनीति से लोगों में आभा और जागृति पैदा होनी चाहिए 301 303 25-12-1952 भारत के हर गांव में दक्षिण अफ्रीका है 302 304 29-1-1953 दलित अपने पर होने वाले अन्याय-अत्याचारों का पूरी ताकत

से विरोध करेंगे 305 305 15-2-1953 बुद्धदर्शन अपनाकर दुनिया युद्ध से परावृत्त हो शांति के

सन्निद्ध पहुंचेगी 306 306 26-3-1953 ईमानदारी, निष्ठा तथा अनुशासन के पालन से संगठन

ताकतवर बनता है 307 307 27-5-1953 मैंने तय किया है कि अपने जीवन के आखिरी दिन बौद्ध धर्म

प्रसार में बिताउंगा 309 308 29-5-1953 छवि बिगाड़ने वाली पोशाकें ना पहनें 312 309 3-6-1953 चरित्र के बिना केवल शिक्षा की कीमत शून्य है 314 310 --7-1953 हमारे कार्यकर्त्ताओं को चाहिए कि वे राजनीतिक, धर्मिक

और आर्थिक समस्याओं का बारीकी से अध्ययन करें 318 311 9-8-1953 शेर बनें ताकि आपके साथ कोई टकराने की हिम्मत नहीं करेगा 322 312 5-10-1953 अस्पृश्यता नष्ट करने के लिए तत्पर न होने वाले राजनीतिक

दलों से सावधान रहिए 323 313 24-1-1954 सच्चे और श्रेष्ठ धर्म की पुनःर्स्थापना करने का कठिन कार्य

अब भावी पीढ़ी के जिम्मे आन पड़ा है 324 314 31-1-1954 आज देश में नैतिकता बची ही नहीं है, जिस देश की

कोई नीतिमत्ता नहीं उसका भविष्य संकटमय है 326 315 20-4-1954 धर्म की तरह राजनीति में निष्ठा का पालन न किया जाए

तो राजनीति लफंगों का बाजार साबित होगी 328 316 20-4-1954 चुनावों द्वारा सीटें पाना एक साधन है, साध्य नहीं 330