233 14-1-1946 जो लोग करोड़ों लोगों को अछूत और अपराधी मानते हां उन्हें आजादी मांगने का हक नहीं - सोलापुर - Page 20

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जो लोग करोड़ों लोगों को अछूत और अपराधी मानते हो उन्हें

आजादी मांगने का हक नहीं

अस्पृश्यों के एकमात्र नेता और भारत सरकार के कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर दिनांक 14 जनवरी, 1946 को सुबह मद्रास मेल से सोलापुर आए।

सुबह सोलापुर नगरपालिका और जिला लोकल बोर्ड संस्था की ओर से हरिभाई देवकरण हाईस्कूल के कै. रा. ब. मुले स्मारक मंदिर में डॉ. अम्बेडकर को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर शहर के प्रमुख व्यवसायी, डॉक्टर्स, सरकारी अधिकारी, वकील आदि आमंत्रित गण्य-मान्य उपस्थित थे।

शुरुआत में नगरपालिका की ओर से प्रदान किए जाने वाले प्रशस्ति-पत्र का मसौदा नगराध्यक्ष रा. ब. नागप्पा अण्णा अफजूलपुरकर ने पढ़ कर सुनाया। फिर प्रशस्ति-पत्र डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को प्रदान किया गया। उसके बाद जिला बोर्ड की ओर से प्रदान किया जाने वाला प्रशस्ति-पत्र बोर्ड के अध्यक्ष श्री जी. डी. साठे ने पढ़ कर सुनाया और प्रदान किया। प्रशस्ति-पत्रों के स्वीकार करने के बाद डॉ. अम्बेडकर ने कहा -

मैं बहुत आभारी हूं कि मुझे प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। सोलापुर शहर मेरे लिए अपरिचित नहीं। मैं कई बार यहां आया हूं। राजनीति और सामाजिक कार्यों का प्रचार भी किया है। सच में देखा जाए तो मेरे सार्वजनिक कार्य की शुरुआत सोलापुर से ही हुई है। स्व. रा. ब. मुले ने अस्पृश्यों के लिए बो²डग खोला और खुशी की बात है कि उनका काम उनके भाई डॉ. भालचंद्र राव बनाम काकासाहब मुले ने बढि़या ढंग से आगे चलाया है ।

भारत सरकार का अब तक का इतिहास देखें तो पता चलता है कि कर वसूलना तथा कानून और व्यवस्था पर नजर रखना यही दो उद्देश्य उनके सामने थे। हालांकि वर्तमान में इनमें कुछ बदलाव आया है। देश की दरिद्रता दुनिया के इतिहास में अपनी ही तरह की मिसाल है। सब मानेंगे कि इसी दरिद्रता को मिटाने का उद्देश्य हमने अपने सामने रखा है। दिल्ली में पुनर्गठन का काम बड़े जोरों से चल रहा है। रहने की सुविधा, शिक्षा, व्यवसाय और उद्योग आदि पर केंद्र सरकार की 90 प्रतिशत ऊर्जा व्यय हो रही है। इस काम में स्थानीय बोर्ड, महानगरपालिका की मदद लेने की नीति अपनाने की व्यवस्था बनाई जाने वाली है।

जनता, 15 जनवरी, 1946