191
हो। कुछ लोग कहते हैं कि कोर्ट की भाषा हिंदी होनी चाहिए। तो कुछ लोगों का कहना है- कोर्ट की भाषा अंग्रेजी होनी चाहिए। स्थानीय भाषा में कानूनी शब्द व्यक्त नहीं हो सकते यह अनुभव है। उदाहरण के तौर पर इक्विटी शब्द के लिए योग्य शब्द नहीं है। इसलिए स्थानीय भाषा का कोर्ट की भाषा होना सबके लिए फायदेमंद शायद साबित न हो। उससे कामकाज में कई मुश्किलें पैदा होंगी। अर्थात्, राष्ट्रीय भाषा के कार्यक्षम होने के बाद उसे उसका योग्य स्थान मिलेगा ही।
मुझे वकील का पेशा बहुत पसंद है। लेकिन लोगों में इस पेशे के लिए आदर की भावना नहीं है। भारत में वकीलों पर कई आरोप लगाये जाते हैं। केन्द्र सरकार से मुक्त होने के बाद मैं इसी पेशे को अपना जीवन समर्पित करने वाला हूं। आज इस देश में लायक वकील बहुत कम हैं। लायक वकील न हों तो यह विभाग की अधोगति को जाएगा। आज इस पेशे को बुरे दिन देखने पड़ रहे हैं इसकी एक वजह यह भी है कि कुछ लोग अवकाश प्राप्ति की उम्र के बाद भी अवकाश नहीं लेते, युवाओं को काम करने का मौका नहीं देते। व्यवसाय की प्रतिष्ठा बनी रहे इसके लिए युवा वकीलों को मौका देना आवश्यक है।
इस व्यवसाय में मर्यादा रखना बेहद जरूरी है उन्होंने आगे कहा- कानून के पंडितों द्वारा आजादी, हेबीअस कॉर्पस और अन्य कामकाज का महत्व जान कर राष्ट्र की सेवा की जानी चाहिए।