276 14-1-1951 बौद्ध धर्म फिर इस देश का धर्म बनेगा - वरली (मुंबई) - Page 213

194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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एक बार फिर बौद्ध धम्म इस देश का धर्म बनेगा

रविवार, 14 जनवरी, 1951 के दिन शाम 6 बजे केंद्रीय कानून मंत्री डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मुंबई के वरली इलाके में बुद्धदूत सोसाइटी द्वारा आयोजित मेले में आए।

शाम 4 बजे से ही दर्शनाभिलाषी लोग सभा स्थान के पंडाल में तथा आसपास जहां भी जगह मिले वहां खड़े थे। ठीक 6 बजे बाबासाहेब कार्यक्रम पंडाल में आए। उनकी जयघोष से आसपास का परिसर गूंज उठा। फूलमालाएं अर्पण कर उनका स्वागत किया गया। उसके बाद प्रो. भागवत ने लोगों से कहा, ‘‘बुद्ध तथा उनके द्वारा दुनिया को मिले अद्वितीय बौद्ध धर्म के बारे में लोगों को जानकारी मिले इस उद्देश्य से यह बुद्धमेला आयोजित किया गया है। चार महीनों पहले यह बुद्धविहार अधूरी बना पड़ी थी। इस काम को जल्द पूरा किया जा सकता है या नहीं इसका खुद हमें भरोसा नहीं था। लेकिन चार माह पूर्व डॉ. बाबासाहेब विहार आए और आश्चर्य! इतने दिन अधूरा पड़ा इमारत बनाने का काम फिर शुरू हुआ। अब यह काम पूरा होने में है। यह केवल बाबासाहेब के आशिर्वादों का प्रभाव है। कुछ लोगों का प्रभाव होता ही ऐसा है। वे अगर मिट्टी भी हाथ में लेते हैं तो सोना होता है। डॉ बाबासाहेब ने जो भी काम अपने हाथ में लिए वे सभी काम अच्छे ढंग पूरे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर सिद्धार्थ कॉलेज को ही लीजिए।‘‘ उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. बाबासाहेब बुद्ध के बारे में एक किताब लिख रहे हैं।

ठीक 6 बज कर 10 मिनट पर डॉ. खड़े हुए तो माहौल तालियों की आवाज से गूंज उठा। एक बार फिर उनके जयकार गूंज उठी। डॉ. बाबासाहेब ने कहा,

प्रिय बहनों और भाइयों,

भाषण देने के लिए मैं यहां उपस्थित नहीं हुआ हूं। मुझे लगा था कि शायद मेला

खत्म हुआ है। लेकिन कल मेरे मित्र प्रो. भागवत मुझसे मिले और उन्होंने बताया कि मेला अभी कई दिनों तक चलने वाला है। यहां आने के लिए मेरे पास समय नहीं था। लेकिन लोगों के आग्रह के कारण मैं ना नहीं कर सका और मैं हाजिर हुआ। ऐसे समारोहों में उपस्थित रहने के क्या परिणाम निकलते हैं मैं अच्छी तरह से जानता हूं। बोलने की कोई भी तैयारी किए बिना मैं आया हूं।

शतकों से चले आ रहे धर्म का दिन अगर मनाना हुआ तो कौन-सा दिन तय किया

जनता, 20 जनवरी, 1951