276 14-1-1951 बौद्ध धर्म फिर इस देश का धर्म बनेगा - वरली (मुंबई) - Page 214

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जाए? कभी लगता है शिवरात्रि के दिन को यह सम्मान मिलना चाहिए, तो कभी लगता है यह दिन राम जयंति या कृष्ण जयंति के दिन मनाया जाए। हिंदू धर्म की संस्कृति द्वारा तय किए गए दिनों के अलावा कोई अन्य विकल्प हमारे दिमाग में नहीं आता। बुद्ध का दिन मनाया जाए यह कल्पना तक किसी के मन में आई नहीं होती। आश्चर्य की बात है कि क्यों ऐसा होता है इसकी वजह मेरी समझ में नहीं आती।

बुद्ध इस दुनिया में 80 वर्ष तक जिए। अपनी उम्र के 45 साल उन्होंने इस देश में प्रचार करने में बिताए। आज शंकराचार्य के पास जैसी मोटरगाड़ी है वैसी मोटरगाड़ी उनके पास नहीं थी। उनके पास सादी गाड़ी या घोड़ा तक नहीं था। यातायात का कोई साधन उन्हें उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद देश के कल्याण के लिए वह जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक पैदल घूमे। बौद्ध धर्म इस देश में 1200 सालों तक था। इस दौरान जिसने भिक्षा मांग कर अपना जीवन बिताया, कई मुसीबतें झेलीं आज इस देश में उसका कोई नाम तक नहीं लेता।

कभी-कभी झूठ की जय होती है, सच्चाई की जय नहीं होती। यह भी ऐसी ही एक बात है। लेकिन सब लोग यह बात ध्यान में रखें कि कभी न कभी सत्य की भी जय होगी ही और आज वह समय आ गया है । 1200 सालों का धर्म एक बार फिर इस देश का धर्म बनेगा इसका मुझे विश्वास है। (तालियां)

हिंदू धर्म किसी नदी की तरह है। दो नदियों का संगम बनता है और उससे एक तीसरी नदी पैदा होती है। हिंदू धर्म ऐसे ही नदी की तरह बना है। एक नदी का पानी साफ होता है और दूसरी नदी का पानी गंदा होता है। इन दोनों का जब मिलन होता है तब साफ पानी भी गंदा हो जाता है। इसी प्रकार हिंदू धर्म की नदी में दो तरह का पानी बह कर आया है। साफ बौद्ध धर्म की नदी और ब्राह्मणी धर्म का गलिच्छ नाला। इन दोनों के संगम के कारण हिंदू धर्म की नदी गंदली हो गई है। उसमें से गंदा और अच्छा पानी अलग करना होगा। तभी गंदगी साफ की जा सकती है।

यहां के भिक्षुमित्र ने बताया कि कई लोग दीक्षा लेना चाहते हैं लेकिन उनसे मैंने कहा कि बौद्ध होना आसान नहीं है। इसीलिए मैं और हमारे लोग मिल कर कुछ नियम बनाने वाले हैं। जो लोग उन नियमों का पालन करेंगे केवल उन्हें ही दीक्षा दी जाएगी। बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के बाद आप हिंदू धर्म की राय और देवता बौद्ध धर्म में नहीं ला सकते। घर में खंडोबा (भगवान की पूजा) और बाहर बुद्ध ऐसा नहीं चल सकता।

साथ ही, जिन हिन्दुओं को दीक्षा लेनी होगी उन्हें हिंदू धर्म की कुरीतियों का त्याग करना होगा। जात मानने वाले लोग बौद्ध बनते हैं और फिर बौद्ध धर्म को ब्राह्मण धर्म बनाते हैं। इस प्रकार बौद्ध धर्म की ही नष्ट करते हैं। बुरे रीति-रिवाजों को लेकर आप बौद्ध धर्म में नहीं आ सकते।