88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रवेश से रोके जाने पर संरक्षण प्राप्त हो सके, बल्कि उन्होंने प्रयत्न करके कुछ विशेष सिफारिशें कीं, जिनमें कुछ विशिष्ट समुदायों का उल्लेख किया, जैसे एंग्लो-इंडियन और दलित वर्ग।
महोदय! किंतु यह संशोधन केवल दलित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए ही नहीं है। मैं यह भी निवेदन कर दूं कि यह सभी समुदायों और महामहिम की प्रजा के हित में है। महोदय! मेरा विचार है कि यदि भारत के किसी भी समुदाय को देश की किन्हीं सेवाओं पर एकाधिकार करने की अनुमति दे दी गई, तो यह जनता के लिए भारी एक
खतरा बन जाएगा। मैंने इसे जनता के लिए भारी खतरा इसलिए कहा है कि इससे उन विशेष समुदायों में जो अपेक्षाकृत सुविधाजनक स्थिति में हैं, न केवल श्रेष्ठता का भाव पैदा हो जाता है, बल्कि उन्हें कुछ विशिष्ट समुदायों द्वारा दिए गए संरक्षण पर निर्भर बनाकर आम जनता का कल्याण भी खतरे में पड़ जाता है। इसलिए मेरा निवेदन है कि जब हम भारत के लिए एक नए संविधान का निर्माण कर रहे हैं, तो हमें ऐसी प्रणाली से इसका प्रारम्भ करना चाहिए, जो महामहिम के समुदाय के प्रत्येक सदस्य को देश की किसी भी लोक सेवा में उसकी योग्यता के अनुरूप भूमिका का निर्वाह करने की अनुमति दे सके और महोदय! यदि अनुमति दें तो मैं कहूं कि मैं जो संशोधन प्रस्तुत कर रहा हूं, वह उस सिद्धांत की ही तार्किक परिणति है, जो पैराग्राफ में ही प्रतिपादित किया गया है, क्योंकि यदि आप खंड 4 के उपखंड 1 को देखें, तो आप यह पाएंगेः
‘उप-समिति का विचार है कि भारत में नए राजनीतिक ढांचे की सरकार बन जाने
के बाद भारत की रक्षा का सरोकार ब्रिटिश सरकार से न रहकर, अधिकाधिक भारत
की जनता से हो जाता।’ महोदय! अब यदि इसका कोई अर्थ होता है, तो वह यह
है कि भारत की रक्षा का संबंध अधिकतर भारत के सभी लोगों से होना चाहिए,
इसका संबंध भारत की जनता से होना चाहिए न कि किसी समुदाय विशेष से।
इसलिए इस सदन से मेरा निवेदन है कि वह मेरे प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार कर ले।
डॉ. मुंजेः डॉ. अम्बेडकर के इस प्रस्ताव से कि भर्ती सभी वर्गों के लिए खोल दी जाए, मैं उनसे सर्वथा सहमत हूं, बशर्ते कि दक्षता का स्तर बनाए रखा जाए।
डॉ. अम्बेडकरः यही तो मेरे संशोधन में है, मैं कहता हूं कि भर्ती और दक्षता में संगति होनी चाहिए।
माननीय तेज बहादुर सपू्रः मैं भी डॉ. अम्बेडकर के साथ हूं।
श्री बसुः अध्यक्ष महोदय! मैं व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहता हूं। इस संशोधन में सेवा संबंधी समिति के विभाग के एक भाग की अतिव्याप्ति है, जिसके खंड 5(4) में किसी भी समिति की सदस्यता के बारे में कहा गया है कि किसी लोक सेवा में जाति, धर्म या वंश के आधार पर पदोन्नति अथवा अधिक्रमण नहीं होगा।