हिंदू समाज-व्यवस्थाः इसके मूलभूत सिद्धांत
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8.268 यदि कोई पुरोहित किसी क्षत्रिय की मानहानि करे तो उस पर पचास
पण का जुर्माना किया जाएगा यदि वह किसी वैश्य की मानहानि करता है
तो उस पर पच्चीस पण का जुर्माना किया जाएगा तथा दास वर्ग के किसी
व्यक्ति की भर्त्सना करने पर उस पर बारह पण का जुर्माना किया जाएगा। अपमान का अपराध लें। मनु द्वारा निर्धारित दंड इस प्रकार हैः
8.270 यदि कोई शूद्र व्यक्ति किसी द्विज की घोर भर्त्सना करता है तो
उसकी जीभ काट दी जाए। क्योंकि उसने ब्रह्मा के निम्नतम भाग से जन्म
लिया है।
8.2.71 यदि शूद्र उनके नामों तथा वर्णों का अपमानपूर्ण तरीके से उल्लेख
करता है, मानो वह कहता है, अरे देवदत्त, तू ब्राह्मण नहीं है तो दस अंगुली
लंबी लोहे की गर्म शलाका उसके मुंह में डाली जाएगी।
8.272 यदि शूद्र घमंडपूर्वक पुरोहितों को उनके कर्तव्यों के लिए निर्देश देता
है, तो राजा उसके मुंह तथा कान में गर्म तेल डालने का आदेश देगा। गाली देने के अपराध का दंड। मनु कहता हैः
8.276 यदि कोई पुरोहित तथा क्षत्रिय आपस में गाली-गलौज करते हैं तो
इस संबंध में जुर्माना विद्वान राजा द्वारा किया जाएगा और वह दंड या जुर्माना
पुरोहित पर सबसे कम तथा क्षत्रिय पर उससे अधिक किया जाएगा।
8.277 उपरोक्त अपराध यदि कोई वैश्य शूद्र करते हैं तब उन्हें जबान काटने
की सजा छोड़कर शेष सभी प्रकार का दंड उनकी जाति के अनुसार दिए
जाएं, दंड का यह निर्धारित नियम है।
प्रहार या मारपीट के अपराध के दंड के रूप में मनु का सिद्धांत इस प्रकार हैः
8.279 जिस अंग द्वारा नीच जाति में जन्मा व्यक्ति ऊंची जाति के व्यक्ति पर
हमला करेगा या उसे चोट पहुंचाएगा, उसका वह अंग काट लिया जाएगा,
यह मनु का अध्यादेश है।
मनु के अनुसार अहंकार के अपराध का दंड इस प्रकार होगाः
8.281 नीच जाति का कोई व्यक्ति यदि उच्च जाति के व्यक्ति के साथ
उसी स्थान पर अभद्रता के साथ बैठेगा, तो उसके कूल्हे को दाग दिया
जाएगा तथा उसे देश निकाला दे दिया जाएगा या राजा उसके नितंब पर
गहरा घाव करवा देगा।
8.282 यदि वह घमंड के साथ उस पर थूकता है, तो राजा उसके दोनों होठों
को यदि वह उस पर पेशाब करता है तो उसके लिंग को यदि वह अपाल
वायु छोड़े तो उसकी गुदा को कटवा देगा।