2. हिंदू समाज व्यवस्था : इसके मूलभूत सिद्धांत - Page 141

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

3.13 एक शूद्र स्त्री केवल शूद्र की पत्नी बन सकती है, वैश्य स्त्री एक

वैश्य की पत्नी बन सकती है। वह दोनों तथा क्षत्रिय स्त्री किसी क्षत्रिय की

पत्नियां बन सकती हैं। वह तीनों तथा ब्राह्मणी ब्राह्मण की पत्नियां बन

सकती हैं।

वस्तुतः मनु अंतर्जातीय विवाह के खिलाफ हैं उनकी व्यवस्था हरेक वर्ग के लिए अपने ही वर्ग में शादी-विवाह करने की है लेकिन वह परिभाषित वर्ग के बाहर भी शादी करने को मान्यता देता है। यहां फिर वह वर्गों के बीच असमानता के अपने सिद्धांत को कोई हानि न होने देने के लिए अंतर्जातीय विवाह के प्रति विशेष रूप से सजग हैं। दासता की तरह वह अंतर्जातीय विवाह की अनुमति तो देता है, पर उल्टे क्रम में नहीं। दासता की तरह वह अंतर्जातीय विवाह की अनुमति तो देता है, पर उल्टे क्रम में नहीं। यदि कोई ब्राह्मण अपनी बिरादरी से बाहर विवाह कर सकता है तो वह अपने से निचले वर्ण की किसी भी स्त्री से विवाह करने के लिए स्वतंत्र है, अर्थात् वह वैश्य तथा शूद्र स्त्री के साथ विवाह कर सकता है, लेकिन अपने से ऊपर के ब्राह्मण वर्ण की स्त्री के साथ विवाह नहीं कर सकता है, लेकिन वह अपने से उच्च वर्णों, ब्राह्मण स्त्री तथा क्षत्रिय स्त्री से विवाह नहीं कर सकता।

तीसरा उदाहरण विधान के नियम में पाया जा सकता है, जिसकी स्थापना मनु ने की है। पहला उदाहरण गवाहों के साथ किए जाने वाले बर्ताव से संबंधित है, गवाहों को निम्नांकित ढंग से शपथ लेनी होती हैः

8.87 शुद्ध हृदय न्यायकर्ता शुद्ध तथा सत्य वक्ता द्विज को कई बार पुकारेगा

कि वह किसी देवता की प्रतिमा या ब्राह्मण की प्रतीक प्रतिमा के समक्ष पूर्व

या उत्तर की ओर मुख करके पूर्वाह्न समय में अपनी गवाही दे।

8.88 न्यायधाश ब्राह्मण से ‘‘कहो’’ क्षत्रिय से ‘सत्य कहो’ वैश्य से गो

बीज और स्वर्ण की चोरी के पाप की झूठी गवाही से तुलना करते हुए तथा

शूद्र से उन सभी पापों जो मनुष्य कर सकता है, के दोषों की झूटी गवाही

से तुलना करते हुए गवाही देने को कहेगा।

मनु द्वारा निर्धारित अपराधों के दंड का उदाहरण लें। सबसे पहले मानहानि के लिए दंड की चर्चा करते हैंः

8.267 यदि कोई क्षत्रिय किसी पुरोहित की मानहानि करता है तो उस पर सौ

पण का जुर्माना किया जाएगा, यदि कोई वैश्य पुरोहित की मानहानि करता

है तो उस पर एक सौ पचास या दो सौ पण का जुर्माना किया जाएगा_

लेकिन ऐसे किसी अपराध के लिए किसी शिल्पी या दास व्यक्ति को कोड़े

लगाए जाएंगे।