172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चातुर्वर्ण्य के बाहर होते थे उन्हें अवर्ण कहा जाता था, अर्थात् जिन पर वर्ण की कोई छाप नहीं लगी होती थी। इन चारों वर्णों से पैदा हुई सभी जातियां सवर्ण हिंदू कही जाती हैं, जिनको अंग्रेजी में ‘कास्ट हिंदू’ (हिंदू जाति) कहते हैं। ‘शेष’ को अवर्ण कहा जाता है जिनकी कि अभी बातचीत चल रही है और जिन्हें यूरोपियन ‘नॉन कास्ट हिंदू’ के नाम से पुकारते हैं, अर्थात् वे लोग जो इन चारों मूल जातियों का वर्णों की परिधि से बाहर हैं।
जो कुछ भी जाति प्रणाली के बारे में लिखा गया है, उसमें अधिकांशतः सवर्ण हिंदुओं की जाति-प्रणाली का ही उल्लेख है। अवर्ण हिंदुओं के बारे में न के बराबर जानकारी है। ये अवर्ण हिंदु कौन हैं, हिंदू समाज में उनकी ओर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। मुझे विश्वास है कि इन प्रश्नों पर विचार किए बिना कोई भी हिंदू समाज-संरचना की सही तस्वीर का आकलन नहीं कर सकता, जिसका हिंदूओं ने निर्माण किया है। सवर्ण हिंदुओं तथा अवर्ण हिंदुओं के बीच वर्ण वैदीर्ण्य को छोड़ देना ठीक ग्रिम की परी कथाओं के समान होगा, जिसमें डायनों, बेतालों तथा पिशाचों को छोड़ दिया गया है।
अवर्ण हिंदुओं में तीन सम्मिलित हैं।
(अपूर्ण)