हिंदुत्व का दर्शन
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विशेष रूप से फलदायी मौसम, पशुधन में वृद्धि तथा युद्ध में विजय, ऐसे
सार्वजनिक लाभ, जो सारे समाज को प्रभावित करते हैं, इनकी देवताओं से
अपेक्षा की जाती थी और जब तक समाज फल-फूल रहा है, तब तक किसी
का व्यक्तिगत दुख दिव्य देवता की किसी भी प्रकार अवमानना नहीं करता
था।’’
इसके विपरीत, प्राचीन संसार किसी मनुष्य के दुख को प्रमाण मानता थाµ
‘‘कि ऐसे व्यक्ति ने कुकर्म किया था और देवताओं की घृणा न्यायपूर्ण थी। ऐसे
मनुष्य के लिए उन लोगों के बीच कोई स्थान नहीं होता था, जो किसी उत्सव
को मनाने के लिए देवता के समक्ष खड़े हों।’’
इस दृष्टिकोण के अनुसार ही कोढ़ से पीडि़त तथा शोकग्रस्त लोगों को धर्म के पालन से तथा सभी सामाजिक सुविधाओं से बाहर रखा जाता था और ऐसे व्यक्ति को उस देवस्थान पर नहीं लाया जाता था, जहां प्रसन्न तथा धनी लोगों की भीड़ समारोह मनाने के लिए एकत्र होती थी।
जहां तक व्यक्ति-व्यक्ति और व्यक्ति तथा समाज के बीच का विवाद है, देवता का उसके साथ कोई संबंध नहीं होता। प्राचीन संसार मेंµ
‘‘मनुष्य के कार्यों में होने वाली भूलों को सुधारने में देवता निरंतर व्यस्त रहें,
ऐसी उनसे अपेक्षा नहीं की जाती थी। सामान्य बातों में मनुष्यों का यह कर्तव्य
था कि वे अपनी और सगे-संबंधियों की सहायता करें, यद्यपि यह धारणा कि
देवता हमेशा हमारे साथ हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसे बुलाया जा सकता
है, समाज को एक प्रकार की नैतिक शक्ति प्रदान करती थी और उससे हमेशा
समाज में सदाचार और नैतिक व्यवस्था बनी रहती थी। किन्तु सही अर्थ में
देखा जाए तो इस नैतिक शक्ति का प्रभाव बहुत ही अनिश्चित हुआ करता था
क्योंकि प्रत्येक अनाचारी के लिए खुशफहमी की यह भावना बनी रहती थी कि
उसका अपराध अनदेखा कर दिया जाएगा। प्राचीन संसार में मनुष्य की देवता
से न्यायसंगत रहने की अपेक्षा नहीं थी। चाहे कोई नागरिक समस्या हो अथवा
अनाचार की बात हो, प्राचीन लोगों की प्रवृत्ति समाज के बारे में ज्यादा सोचने
की और व्यक्ति के बारे में कम सोचने की होती थी, और कोई भी व्यक्ति
उसे अन्यायपूर्ण नहीं मानता था, यद्यपि यह बात स्वयं उससे संबंधित होती
थी। देवता पूरे राष्ट्र का अथवा पूरे कबीले का हुआ करता था और वह किसी
व्यक्ति की चिंता समुदाय के एक सदस्य के रूप में ही करता था।’’
‘अपने निजी दुर्भाग्य के लिए’ मनुष्य की प्रवृत्ति प्राचान संसार में इसी प्रकार थी। मनुष्य देवता के समक्ष प्रसन्न होने के लिए जाता था औरµ