1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कर सकता जो उससे ऊंचा वर्ण है। एक वैश्य किसी शूद्र वर्ण की स्त्री के साथ विवाह कर सकता है जो सीधे उससे नीचे हैं, परंतु वह ब्राह्मण तथा क्षत्रिय वर्ण की स्त्री के साथ विवाह नहीं कर सकता।

यह भेदभाव क्यों? इसका केवल एक ही उत्तर है कि मनु असमानता के नियम को बनाए रखने के लिए अत्यधिक उत्सुक था।

हम विधि के नियम को ही लें। विधि के नियम का सर्वसाधारण अर्थ यही समझा जाता है कि कानून के सामने सभी समान हैं। इस विषय पर मनु का क्या कहना है, यह बात जो कोई जानना चाहता हो, वह उसकी आचार-संहिता के निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत प्रस्तुत किया है।

गवाही देने के लिए-मनु के अनुसार उसे निम्न प्रकार से शपथ दी जाएः

8.87 - शुद्ध हृदय न्यायकर्ता शुद्ध तथा सत्य वक्ता द्विज को कई बार पुकारेगा

कि वह किसी देवता की प्रतिमा या ब्राह्मण की प्रतीक प्रतिमा के समक्ष पूर्व

या उत्तर की ओर मुखकर खड़े होकर पूर्वाह्न में अपनी गवाही दे।

8.88 - न्यायाधीश ब्राह्मण से ‘कहो’ क्षत्रिय से ‘सत्य कहो’ वैश्य से ‘गो

बीज’ और स्वर्ण की चोरी के पाप की ‘झूठी गवाही’ से तुलना करते हुए

तथा शूद्र से उन सभी पापों जो मनुष्य कर सकता है, के दोषों की झूठी

गवाही से तुनला करते हुए गवाही देने को कहेगा।

8.113 - न्यायाधीश पुरोहित को उसके सत्य वचन की, क्षत्रिय को उसके

घोड़ा, हाथी अथवा शस्त्र की, वैश्य को उसकी गाय, अनाज, आभूषणों की,

शूद्र को उसके सिर पर हाथ रखकर, यदि वह झूठ बोला तो उसे सब पाप

लगें कहकर शपथ दे।

मनु झूठी गवाही देने वाले मामलों पर भी विचार करता है। उसके अनुसार झूठी गवाही देना अपराध है। वह कहता हैः

8.122. न्याय की विफलता को रोकने के लिए तथा दुराचार को रोकने के

लिए बुद्धिमान मनुष्यों ने झूठी गवाही देने वालों के लिए कुछ दंड बतलाए

हैं, जिनकी आज्ञा ऋषि विधायकों ने दी है।

8.123. निम्न वर्णों को न्यायी राजा झूठी गवाही देने के लिए पहले जुर्माना

लेकर उन्हें राज्य की सीमा त्याग देने को कहे, परंतु ब्राह्मण को केवल राज्य

की सीमा त्यागने को कहे। किन्तु मनु ने एक अपवाद स्थापित कियाः