हिंदुत्व का दर्शन
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लाभकारी प्रभाव होता है। कदाचित वह सभी को एक समान स्तर पर लाने की शक्ति बन जाति-व्यवस्था की नींव को नष्ट कर देती, क्योंकि शायद उसके अंतर्गत ब्राह्मण किसी अछूत का गुलाम और अछूत किसी ब्राह्मण का मालिक बन सकता था। परंतु जब यह स्पष्ट हो गया कि अनुबंधित गुलामी उसी जैसा सिद्धांत है, तब उसे ही विफल करने के प्रयास किए गए। इसलिए मनु और उसके उत्तराधिकारियों ने गुलामी को मान्यता प्रदान करते हुए इस बात का भी आदेश दिया कि उसे वर्ण-व्यवस्था के उल्ट क्रम से लागू नहीं किया जाए। इसका मतलब है, एक ब्राह्मण दूसरे ब्राह्मण का गुलाम बन सकता है, परंतु वह किसी दूसरे वर्ण का, जैसे क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र अथवा अतिशूद्र का गुलाम नहीं हो सकता। परंतु दूसरी ओर एक ब्राह्मण इन चार वर्णों के किसी भी व्यक्ति को गुलाम बना सकता है, परंतु उस व्यक्ति को नहीं जो ब्राह्मण है एक वैश्य किसी वैश्य, शूद्र तथा अतिशूद्र को गुलाम बना सकता है, परंतु उसे नहीं जो ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय नहीं जो ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य है। एक अतिशूद्र किसी अतिशूद्र को ही गुलाम बना सकता है, पंरतु उसे नहीं जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र है।
अब विवाह पर मनु की धारणा का विचार करें। नीचे मनु के विभिन्न वर्णों के अंतर्जातीय विवाह के नियम दिए गए हैं। मनु कहता हैः
3.12 द्विजों की पहली शादी के लिए उसकी जाति की स्त्री की ही संस्तुति
की जाती है परंतु ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें किसी कारण से पुनर्विवाह करना
हो, उनके वर्णों के सीधे नीचे वर्ण की स्त्रियों को वरीयता दी जाती है।
3.13 एक शूद्र स्त्री केवल शूद्र की पत्नी बन सकती है_ शूद्र और वैश्व
स्त्री एक वैश्व की पत्नी बन सकती है_ वे दोनों तथा क्षत्रिय स्त्री एक
क्षत्रिय की पत्नी बन सकती है_ और वे तीनों तथा ब्राह्मणी, ब्राह्मण की
पत्नियां बन सकती हैं।
मनु अंतर्जातीय विवाह का विरोधी है। उसका कहना है कि प्रत्येक वर्ण अपने वर्ण मेंं ही विवाह करे। परंतु उसकी निश्चित वर्ण के बाहर के विवाह को मान्यता थी_ फिर यहां भी वह इस बात के लिए विशेष रूप से सचेत था कि अंतर्जातीय विवाह से उसके वर्णों की असमानता के सिद्धांत को हानि न पहुंच सके। गुलामी के समान वह अंतर्जातीय विवाह को अनुमति देता है, परंतु उल्ट क्रम से नहीं। एक ब्राह्मण जब अपने वर्ण के बाहर विवाह करना चाहे, तब उसके नीचे के किसी वर्ण के साथ विवाह कर सकता है एक क्षत्रिय उसके नीचे के दो वर्णों, वैश्य और शूद्र स्त्री के साथ विवाह कर सकता है, परंतु किसी ब्राह्मण स्त्री के साथ विवाह नहीं