4. सुधारक और उनकी नियति - Page 104

सुधारक और उनकी नियति

हैं, जिनके बारे में मैंने बताया।

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  1. और जब वह इस प्रकार बोल चुके, लोहिक्क ब्राह्मण परम श्रेष्ठ से इस प्रकार बोलेः ‘लेकिन, गौतम, क्या विश्व में इस प्रकार का भी कोई गुरु है, जो दोषारोपण के योग्य न हो?’

‘हां, लोहिक्क, विश्व में एक ऐसा गुरु है, जो दोषारोपण के योग्य नहीं है।’

‘और, गौतम, वह किस प्रकार का गुरु है?’

(इसका उत्तर ऊपर दिए गए व्याख्यात्मक शब्दों के रूप में श्रमण-फल में है।) यह निम्नानुसार हैः

  1. तथागत (जिसने सत्य पर विजय प्राप्त कर ली हो) का आविर्भाव, उनके उपदेश, श्रोता के धर्मान्तरण और उनके द्वारा गृहविहीन स्थिति का अंगीकार किया जाना।

  2. शील का सूक्ष्म विवरण, जिसका वह पालन करता है।

  3. हृदय का विश्वास, जो वह अपने व्यवहार द्वारा प्राप्त करते हैं।

  4. ‘इंद्रियों का द्वार सुरक्षित है’ के संबंध में अनुच्छेद।

  5. ‘सावधान और आत्मलीन’ के संबंध में अनुच्छेद।

  6. थोड़े से संतुष्ट, जीवन की सादगी के संबंध में अनुच्छेद।

  7. उद्धार, असंयमित स्वभाव, आलस्य, चिंता और विमूढ़ता के संबंध में अनुच्छेद।

  8. इस मुक्ति के फलस्वरूप प्राप्त आनंद और शांति जिससे उसका संपूर्ण अस्तित्व परिपूर्ण हो जाता है, के संबंध में अनुच्छेद।

  9. चार हर्षोन्माद (गाथा) के संबंध में अनुच्छेद।

  10. ज्ञान से उत्पन्न अंतर्दृष्टि के संबंध में अनुच्छेद (प्रथम मार्ग का ज्ञान)।

  11. चार महान सत्यों, मादक द्रव्योंµलोभ, मोह, भविष्य, अज्ञानता का विनाशµऔर अर्हंत के पद की प्राप्ति के संबंध में अनुच्छेद।

टेक के साथ, अंतिम अनुच्छेद इस प्रकार हैः

‘और गुरु, चाहे कोई भी हो, लोहिक्क, जिसके अधीन शिष्य इतनी उत्कृष्टता प्राप्त करता है, वैसे गुरु पर विश्व में कोई दोषारोपण नहीं कर सकता। और ऐसे गुरु पर जो भी दोषारोपण करेगा, उसकी भर्त्सना न्यायोचित नहीं होगीµतथ्यों अथवा सत्य के अनुरुप नहीं होगी, और उसका समुचित आधार नहीं होगा।’

  1. और जब वह इस प्रकार बोल चुके, तो लोहिक्क ब्राह्मण ने परम श्रेष्ठ से कहाः ‘किसी मनुष्य को कोई उसके सिर के बालों से खींचकर पकड़ ले और उसे उठाकर