88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लोहिक्क, यह विश्व में पहले प्रकार का गुरु है, जो दोषारोपण के योग्य है। और जो कोई भी ऐसे को दोषी बताएगा, उसकी भर्त्सना न्यायोचित होगी, तथ्यों और सत्य के अनुरूप, अनुचित नहीं होगी।
- दूसरे स्थान पर, लोहिक्क, एक इस प्रकार का गुरु होता है, जो श्रमण के उस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सका है, जिसके कारण उसने गृह-त्याग किया और गृहविहीन जीवन अंगीकार किया। उस लक्ष्य को स्वयं प्राप्त किए बिना वह अपने श्रोताओं को सिद्धांत का उपदेश देता है और कहता हैः ‘यह तुम्हारे लिए श्रेयस्कर है, इससे तुम्हें प्रसन्नता प्राप्त होगी।’ और उसके शिष्य सुनते हैं, उसके शब्दों पर ध्यान देते हैं, कही हुई बात को समझकर वे चित्त की स्थिरता प्राप्त करते हैं, और गुरु के उपदेश से अलग वे अपने ही मार्ग पर नहीं चलते। इस प्रकार के गुरु की भर्त्सना की जानी चाहिए, और उसे इन तथ्यों की जानकारी कराते हुए यह भी बताना चाहिएः ‘तुम उस मनुष्य की तरह हो, जो अपने खेत की तरफ ध्यान न देकर अपने पड़ोसी के खेत की निराई के बारे में सोचेगा।’ मैं कहता हूं, तुम्हारा यह लोभ भी उसी प्रकार का है (दूसरों को शिक्षा देते रहना, जब कि तुमने स्वयं को शिक्षित नहीं किया है)। तब एक मनुष्य दूसरे के लिए क्या कर सकता है?
लोहिक्क, यह विश्व में दूसरे प्रकार का गुरु है, जो दोषारोपण के योग्य है। और जो भी ऐसे गुरु की भर्त्सना करेगा, उसकी भर्त्सना न्यायोचित होगी, तथ्यों और सत्य के अनुरूप, अनुचित नहीं होगी।
- और पुनः, लोहिक्क, तीसरे स्थान पर एक इस प्रकार का गुरु होता है, जो स्वयं श्रमण के उस लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है, जिसके कारण उसने गृह-त्याग किया और गृहविहीन जीवन अंगीकार किया। उस लक्ष्य को स्वयं प्राप्त कर चुकने के बाद वह अपने श्रोताओं को सिद्धांत का उपदेश देता है और कहता हैः ‘यह तुम्हारे लिए श्रेयस्कर है, इससे तुम्हें प्रसन्नता प्राप्त होगी।’ किंतु उसके वे श्रोता न तो उसकी बात सुनते हैं, न उसके शब्दों पर ध्यान देते हैं, न उसकी बात को समझकर चित्त की स्थिरता प्राप्त करते हैं। गुरु के उपदेश से अलग वे अपने ही मार्ग पर चलते हैं। इस प्रकार के गुरु की भर्त्सना की जानी चाहिए और उसे इन तथ्यों की जानकारी देते हुए यह भी बताना चाहिएः ‘तुम उस मनुष्य की तरह हो जो पुराने बंधन को तोड़कर स्वयं को नए बंधन में फंसा लेता है।’ मैं कहता हूं, तुम्हारा लोभ उसी प्रकार का है (शिक्षा देते रहना, जब कि तुमने शिक्षा देने के लिए स्वयं को प्रशिक्षित नहीं किया है)। तब किसलिए, एक मनुष्य दूसरे के लिए कुछ करे?
लोहिक्क, विश्व में यह तीसरे प्रकार का गुरु है, जो दोषारोपण के योग्य है। और जो भी इस प्रकार के गुरु को दोषी बताएगा, उसकी भर्त्सना न्यायोचित होगी, तथ्यों और सत्य के अनुरूप, अनुचित नहीं होगी। और, लोहिक्क, ये तीन प्रकार के गुरु