6. ब्राह्मण साहित्य - Page 123

108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रामायण का संदर्भ तो आया है, किंतु उसके लेखक का उल्लेख नहीं मिलता। दूसरे प्रसंग में वाल्मीकि की रामायण का उल्लेख हुआ है। किंतु इन दिनों जो उपलब्ध रामायण है, वह वाल्मीकि ख्1, रचित नहीं है। श्री सी.वी. वैद्य के मतानुसार ख्2, ः

वर्तमान रामायण वाल्मीकि द्वारा मूलतः लिखित रामायण नहीं है, चाहे इसे

इसी रूप में महान चिंतक और भाष्यकार कटक ने ही क्यों न स्वीकार किया

हो। रूढि़वादी विचारक भी इस तथ्य को स्वीकार करने में नहीं हिचकिचाएगा।

चाहे कोई वर्तमान रामायण को सरसरी तौर पर ही क्यों न पढ़े, वह उसमें आई

असंगतियों, पृथक प्रसंगों में परस्पर संबंधहीनता या प्रचुर मात्रा में उपलब्ध नूतन

और पुरातन, दोनों प्रकार के विचारों के गठबंधन को देखकर अवश्य हतप्रभ रह

जाएगा। यह बात रामायण के बंगाल या बंबई वाले किसी भी पाठ में देखी जा

सकती है। इन सब बातों को देखकर कोई भी इस नतीजे पर अवश्य पहुंचेगा

कि वाल्मीकि रामायण में आगे चलकर बहुत फेर-बदल हुआ।

महाभारत की ही तरह रामायण की कथावस्तु में भी कालांतर में क्षेपक जुड़ते गए। आरंभ में रामायण की कथा इतनी भर थी कि रावण ने राम की पत्नी सीता का हरण कर लिया, इसलिए राम और रावण युद्ध हुआ। अगले संस्करण में इस कथा में कुछ उपदेश भी जुड़ गए। तब एक विशुद्ध ऐतिहासिक काव्य के स्थान पर यह कृति उपदेशात्मक बन गई, जिसका उद्देश्य सामाजिक, नैतिक और धार्मिक कर्तव्यों के सही नियमों की शिक्षा देना था। जब इसका तीसरा संस्करण बना तो यह भी महाभारत की ही तरह दंतकथाओं, ज्ञान, शिक्षा, दर्शन तथा अन्य कलाओं और विज्ञानों का भंडार बन गई।

रामायण की रचना कब हुई, इसके बारे में एक सर्वसम्मत दृष्टिकोण यह है कि राम की घटना पांडवों की घटना से अधिक पुरानी है, किंतु रामायण और महाभारत का लेखन-कर्म साथ-साथ ही चला होगा। हो सकता है कि रामायण के कुछ अंश महाभारत से पहले लिखे गए हों, किंतु इस बात में किसी तरह का संदेह नहीं है कि रामायण का अधिकांश भाग महाभारत के अधिकांश भाग के लिखे जाने के बाद ही लिखा गया होगा। ख्3,

(अपूर्ण)

  1. दि ग्रेट इपिक ऑफ इंडिया, होपकिन्स पृ. 62

  2. दि रिडिल ऑफ दि रामायण, अध्याय 2, पृ. 6

  3. इन दोनों महाकाव्यों में समान पदावली के लिए होपकिन्स की दि गे्रट इपिक आफ इंडिया में परिशिष्ट

‘ए’ देखें।