1. प्राचीन भारत के इतिहास पर प्रकाश - Page 18

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प्राचीन भारत के इतिहास पर प्रकाश

प्रस्तुत अध्याय की मूल अंगे्रजी में टाइप की हुई दो प्रतिलिपियां

हैं। दोनों प्रतिलिपियों में बाबासाहेब की लिखावट में कुछ वृद्धि तथा

संशोधन किया गया है। विचार करने के बाद निर्णय लिया गया कि

बाद की प्रतिलिपि को छापा जाए। यह निबंध जो मात्र तीन पृष्ठ का

है, किसी अधिक बड़े विषय की प्रस्तावना प्रतीत होता है, जो संभवतः

डॉ. अम्बेडकर के मस्तिष्क में था µ संपादक

प्राचीन भारत के इतिहास का काफी हिस्सा बिल्कुल भी इतिहास नहीं है। ऐसा नहीं है कि प्राचीन भारत बिना इतिहास के है। प्राचीन भारत का बहुत सारा इतिहास है। लेकिन वह अपना स्वरूप खो चुका है। महिलाओं और बच्चों का मनोरंजन करने के लिए इसे पौराणिक आख्यान बना दिया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि ब्राह्मणवादी लेखकों ने जान-बूझकर ऐसा किया है। ‘देव’ शब्द को लीजिए। इसका क्या अर्थ है? क्या ‘जन-विशेष’ शब्द मानव परिवार के एक सदस्य का निरूपण करने के लिए प्रयुक्त हुआ है? यह महामानव वर्ग के निरूपण के लिए प्रयुक्त हुआ है। इस प्रकार इतिहास का सार दबा दिया गया है।

‘देव’ शब्द के साथ-साथ यक्ष, गण, गंधर्व, किन्नर नामों का भी उल्लेख है। वे कौन थे? महाभारत और रामायण पढ़ने के बाद समझ में आता है कि ये काल्पनिक मानव थे, जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं था।

लेकिन यक्ष, गण, गंधर्व, किन्नर भी मानव परिवार के सदस्य थे। वे देवों की सेवा में थे। यक्ष महलों की पहरेदारी करते थे। गण देवों की रक्षा करते थे। गंधर्व संगीत और नृत्य द्वारा देवों का मनोरंजन किया करते थे। किन्नर भी देवताओं की सेवा में थे। किन्नरों के वंशज आज भी हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।

‘असुर’ नाम को लीजिए। असुर का वर्णन महाभारत और रामायण में जिस प्रकार किया गया है, उससे समझ में आता है कि जैसे ये मानव-रहित दुनिया में रहते हैं। असुर