6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बढ़ गए थे। महाभारत ख्2, से पता चलता है कि पांडवों के सबसे बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर ने जुए में अपने छोटे भाइयों और पत्नी द्रौपदी सहित सब कुछ दांव पर लगा दिया था। जुआ आर्यों के लिए सम्मान का प्रतीक था, और जुए का कोई आमंत्रण सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए चुनौती माना जाता था। धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा जुआ खेलने के अनर्थकारी परिणाम हुए, यद्यपि उन्हें ऐसे परिणाम की पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी। उनका बहाना यह था कि उन्हें जुए का आमंत्रण मिला था, और एक सम्माननीय व्यक्ति होने के नाते वह ऐसा आमंत्रण ठुकरा नहीं सकते थे।
जुए का दुर्गुण सिर्फ राजाओं तक सीमित नहीं था। यहां तक कि आम आदमी भी इससे ग्रसित था। ऋग्वेद में जुए से बर्बाद हुए आर्य के विलाप का विवरण मिलता है। कौटिल्य के समय में जुआ खेलना इतनी आम बात हो गई थी कि जुआघरों को राजा द्वारा अनुमति-पत्र दिए जाते थे, जिससे राजा को यथेष्ट राजस्व मिलता था।
शराब पीना दूसरी बुराई थी, जो आर्यों में प्रचंड रूप से फैली हुई थी। शराब दो प्रकार की हुआ करती थी-सोम और सुरा। सोम यज्ञीय शराब थी। प्रारंभ में ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों को सोम पीने की अनुमति थी। बाद में ब्राह्मणों और क्षत्रियों को इसके पीने की अनुमति दी गई। वैश्यों को इसे पीना वर्जित कर दिया गया था, और शूद्रों को तो इसका स्वाद चखने की भी अनुमति नहीं थी। इसका बनाना एक गुप्त प्रक्रिया थी, जिसकी जानकारी केवल ब्राह्मणों को थी। सुरा पीने की अनुमति सभी को थी तथा इसे सभी पीते थे। ब्राह्मण सुरा भी पीते थे। असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य ने इतनी अधिक पी ली थी कि नशे की स्थिति में उन्होंने मृत संजीवनी मंत्र ही बता दिया, जो केवल वही जानते थे, तथा जिसका वह देवों द्वारा मारे गए असुरों को जीवित करने के लिए प्रयोग करते थे। यह मंत्र उन्होंने देवों के पुरोहित बृहस्पति के पुत्र कच को बताया था। महाभारत में एक प्रसंग है कि एक बार कृष्ण और अर्जुन ने अत्यधिक सोमरस पी लिया था। यह दर्शाता है कि आर्यों के समाज में सर्वश्रेष्ठ न सिर्फ शराब पीने के आदी थे, बल्कि वे बहुत अधिक शराब पीते थे। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि आर्य महिलाएं भी शराब पीने की आदी थीं। उदाहरण के लिए, राजा विराट की पत्नी सुदेशना ख्1, ने अपनी चेरी सैरंध्री को कहा कि कीचक के महल से सुरा ले आओ, क्योंकि वह पीने के लिए मरी जा रही है। इसका अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि केवल रानियां ही शराब पीती थीं। शराब पीने की आदत हर वर्ग की महिलाओं में सामान्य बात थी, और यहां तक कि ब्राह्मण महिलाएं भी इस आदत से बची हुई नहीं थीं। आर्य महिलाएं शराब पीती थीं और नाचती थीं, यह कौसीतकी गृह्य सूत्र (1.11-12) से स्पष्ट हो जाता है। सूत्र कहता हैः ‘चार या आठ सधवा महिलाएं शराब और भोजन का सेवन कर लेने के बाद वैवाहिक समारोह से पहले की रात में चार बार नाचेंगी।’ निम्न वर्ग की
वही, सभा पर्व
महाभारत, वन पर्व, अध्याय 15-10