266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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विराट पर्व और उद्योग पर्व की
विश्लेषणात्मक टिप्पणियां
विराट पर्व
कौरवों ने पांडवों के अस्तित्व का पता लगाने के लिए गुप्तचर भेजे, परंतु वे गुप्तचर दुर्योधन के पास लौट आते हैं और बताते हैं कि वे पांडवों का पता लगाने में असमर्थ हैं। ये दुर्योधन की आज्ञा के अभिलाषी हैं कि अब क्या किया जाए? - (विराट पर्व, अध्याय-25)
दुर्योधन अपने सलाहकारों से परामर्श करता है। कर्ण ने कहा कि अन्य गुप्तचर भेजे जाएं। दुःशासन ने कहा कि पांडव समुद्र पार चले गए होंगे। परंतु उनकी खोज की जाए।-(वही, अध्याय-26)
द्रोण ने कहा कि पांडवों को हराना अथवा उन्हें नष्ट करना संभव नहीं है। वे तपस्वी के वेष में होंगे, अतः सिद्धों और ब्राह्मणों को गुप्तचर के रूप में भेजा जाएµ (वही, अध्याय-27)
भीष्म द्रोण का समर्थन करते हैं।-(वही, अध्याय-28)
कृपाचार्य ने भीष्म का समर्थन किया और कहा - पांडव हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं। परंतु बुद्धिमान लोग छोटे शत्रुओं की भी अवहेलना नहीं करते हैं। जब वे अज्ञातवास में हैं तो आप अभी से जाकर सेनाओं को एकत्र करें।-(वही, अध्याय-29)
इसके बाद त्रिगढ़ के सम्राट सुशर्मा ने एक अलग विषय प्रस्तुत किया। उसने बताया कि कीचक के बारे में ‘मैंने’ सुना है कि उसका निधन हो गया है, जो सम्राट विराट का सेनापति था। सम्राट विराट का सेनापति था। सम्राट विराट हमें अत्यधिक कष्ट देने वाला है। कीचक के निधन के बाद विराट को बहुत अधिक दुर्बल होना चाहिए। विराट के साम्राज्य पर क्यों न आक्रमण किया जाए? यह सबसे उपयुक्त समय है। कर्ण