331
14
बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स
कार्ल मार्क्स तथा बुद्ध में तुलना करने के कार्य को कुछ लोगों द्वारा एक मजाक माना जाए, तो इसमे कोई आश्चर्य नहीं है। मार्क्स तथा बुद्ध के बीच 2381 वर्ष का अंतर है। बुद्ध का जन्म ई.पू. 563 में हुआ था और कार्ल मार्क्स का जन्म सन् 1818 में हुआ। कार्ल मार्क्स को एक नई विचारधारा व नए मतµराज्य शासन का व एक नई आथि्र्ाक व्यवस्था का निर्माता माना जाता है। इसके विपरीत बुद्ध को एक ऐसे धर्म के संस्थापक के अलावा और कुछ नहीं माना जाता, जिसका राजनीति या अर्थशास्त्र से कोई संबंध नहीं है। इस निबंध के शीर्षक ‘बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स’ से ऐसा आभास होता है कि यह इन दोनों व्यक्तियों के बीच समानता को बताने वाला है या विषमता को दर्शाने वाला है। इन दोनों के बीच समय का बहुत बड़ा अंतराल है। उनके विचार-क्षेत्र भी अलग-अलग हैं। अतः इस शीर्षक का अजीब-सा प्रतीत होना अवश्यंभावी है। मार्क्सवादी इस पर आसानी से हंस सकते हैं और मार्क्स तथा बुद्ध को एक समान स्तर पर लाने का मजाक व हंसी उड़ा सकते है। मार्क्स बहुत आधुनिक और बुद्ध बहुत पुरातन हैं। मार्क्सवादी यह कह सकते हैं कि उनके गुण की तुलना में बुद्ध केवल आदिम व अपरिष्कृत ही ठहर सकते है। फिर, ऐसे दो व्यक्तियों के बीच क्या समानता या तुलना हो सकती है? एक मार्क्सवादी बुद्ध से क्या सीख सकता है? बुद्ध एक मार्क्सवादी को क्या शिक्षा दे सकते हैं? फिर भी इन दोनों के बीच तुलना आकर्षक तथा शिक्षाप्रद है। इन दोनों के अघ्ययन तथा इन दोनों की विचारधारा व सिद्धांत में मेरी भी रुचि है। इस कारण इन दोनों के बीच तुलना करने का विचार मेरे मन में आया। यदि मार्क्सवादी अपने पूर्वाग्रहों को पीछे रखकर बुद्ध का अध्ययन करें और उन बातों को समझें जो उन्होंने कहीं हैं और जिनके लिए उन्होंने संघर्ष किया, तो मुझे यकीन है उनका दृष्टिकोण बदल जाएगा। वास्तव में उनसे यह आशा नहीं की जा सकती कि बुद्ध की हंसी व मजाक उड़ाने का निश्चय करने के बाद वे उनकी प्रार्थना करेंगे। पंरतु इतना कहा जा सकता है कि उनको यह महसूस होगा कि बुद्ध की शिक्षाओं व उपदेशों में कुछ ऐसी बात है, जो ध्यान में रखने के योग्य और बहुत लाभप्रद हैं।