14. बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स - Page 356

बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स

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दसवीं बाधा अज्ञानता है। यद्यपि अन्य सब कठिनाइयों व बाधाओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है, फिर भी यह बनी ही रहेगी, बुद्धिमान तथा अच्छे व्यक्ति के शरीर में कांटे के समान चुभती रहेगी। यह मनुष्य की अंतिम तथा सबसे बड़ी शत्रु है।

आर्य अष्टांग मार्ग का अनुसरण करके इन बाधाओं पर विजय प्राप्त करना ही निब्­ बान है। आर्य अष्टांग मार्ग सिद्धांत यह बताता है कि मनुष्य का मन की कौन-सी स्थिति व मनोवृति का परिश्रमपूर्वक पोषण करना चाहिए। निब्बान का सिद्धांत उस प्रलोभन या बाधा के विषय में बताता है, जिस पर यदि व्यक्ति आर्य अष्टांग मार्ग का अनुसरण करना चाहता है तो उन पर गंभीरतापूर्वक विजय प्राप्त करनी चाहिए। नवीन सिद्धांत का चौथा भाग परिमिता का सिद्धांत है। परिमिता का सिद्धांत एक व्यक्ति के दैनिक जीवन में दस गुणों का आचरण करने के लिए प्रेरित करता है। वे दस गुण इस प्रकार हैंः

(1) पन्न, (2) शील, (3) नेक्खम, (4) दान, (5) वीर्य, (6) खांति (शांति),

(7) सच्च, (8) अधित्थान, (9) मेत्त, और (10) उपेक्खा।

पन्न या बुद्धि वह प्रकाश है जो अविद्या, मोह या अज्ञान के अंधकार को हटाता है। पन्न के लिए यह अपेक्षित है कि व्यक्ति अपने से अधिक बुद्धिमान व्यक्ति स पूछकर अपनी सभी शंकाओं का समाधान कर ले, बुद्धिमान लोगों से संबंध रखे और विभिन्न कलाओं और विज्ञान का अर्जन करे, जो उसकी बुद्धि विकसित होने में सहायक हों। शील नैतिक मनोवृत्ति अर्थात् बुरा न करने और अच्छा करने की मनोवृत्ति, गलत काम करने पर लज्जित होना है। दंड के भय से बुरा काम न करना शील है। शील का अर्थ है, गलत काम करने का भय। नेक्खम संसार के सुखों का परित्याग है।

दान का अर्थ अपनी संपत्ति, रक्त तथा अंग का उसके बदले में किसी चीज की आशा किए बिना, दूसरों के हित व भलाई के लिए अपने जीवन तक को भी उत्सर्ग करना है।

वीर्य का अर्थ है, सम्यक प्रयास। आपने जो कार्य करने का निश्चय कर लिया है, उसे पूरी शक्ति से कभी भी पीछे मुड़कर देखे बिना करना है।

खांति (शांति) का अभिप्राय सहिष्णुता है। इसका सार है कि घृणा का मुका­ बला घृणा से नहीं करना चाहिए क्योंकि घृणा, घृणा से शांत नहीं होती। इसे केवल सहिष्णुता द्वारा ही शांत किया जाता है।

सच्च (सत्य) सच्चाई है। बुद्ध बनने का आकांक्षी कभी भी झूठ नहीं बोलता। उसका वचन सत्य होता है। सत्य के अलावा कुछ नहीं होता।

अधित्थान अपने लक्ष्य तक पहुँचने के दृढ़ संकल्प को कहते हैं।

मेत्त (मैत्री) सभी प्राणियों के प्रति सहानुभूति की भावना है, चाहे कोई शत्रु हो या