2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पीर बाबा मलंगशाह की मशहूर दरगाह है। यह बहुत ही प्रसिद्ध दरगाह है। हर साल वहां उर्स लगता है और चढ़ावा चढ़ाया जाता है। दरगाह का पीर एक ब्राह्मण है जो मुसलमानों जैसी पोशाक पहने वहां विराजमान रहता है और चढ़ावा बटोर लेता है। यह सब कमाई का धंधा है, धर्म जाए भाड़ में। ब्राह्मण को सिर्फ दक्षिणा से गरज है। दरअसल ब्राह्मणों ने धर्म को व्यापार बना रखा है। जरा ब्राह्मणों की श्रद्धा हीनता की तुलना यहूदियों की अपने देवताओं के प्रति अटूट श्रृद्धा से करें जब उनके विजेता नेबूचादनेज्जार ने उनको अपना ध र्म को त्याग कर उसका धर्म अपनाने को मजबूर किया। ख्1,
राजा नेबूचादनेज्जार ने एक स्वर्ण मूर्ति बनवाई, जिसकी ऊंचाई साठ हाथ और चौड़ाई छह हाथ थी। उसने उसे बेबीलोन प्रांत के मैदान दुरा में स्थापित कराया।
तब राजा नेबूचादनेज्जार ने राजकुमारों, न्यायाधीशों, कोषाधिपतियों, अमात्यों और प्रांतों के सभी शासकों आदि को बुलाया कि वे मूर्ति के समर्पण के समय उपस्थित हों।
फिर राजकुमार, शासक, न्यायाधीश, कोषाधिपति, अमात्य और प्रांतों के शासक आदि उस समय तक उपस्थित रहे जब तक कि राजा द्वारा बनवाई गई मूर्ति स्थापित हुई।
तब अग्रदूतों ने ऊंचे स्वर में कहा ‘हे लोगों! हे शासकों! बहुभाषा विदो! तुम्हारे लिए आदेश है।
कि जिस समय तुम विविध संगीत स्वरों में वाद्यवृद सुनो तो नेबूचादनेज्जार द्वारा निर्मित स्वर्ण-मूर्ति को साष्टांग दंडवत कर पूजा करो जिसे राजा ने स्थापित किया है।
और जो कोई भी दंडवत नहीं करेगा, उसे दहकती भट्टी में झौंक दिया जाएगा।
इसलिए उस समय सब लोगों, शासकों और बहुभाषाविदों, ने विभिन्न वाद्यों का नाद सुना तो सभी लोग लेट गए और उन्होंने नेबूचादनेज्जार द्वारा स्थापित मूर्ति की पूजा की।
तभी कोई चालडीएन्स वहां आया और यहूदियों को अपशब्द कहे।
उन्होंने राजा नेबूचादनेज्जार से कहा, ‘हे राजा, तू अमर रहे।’
हे राजा! तूने एक आदेश जारी किया है कि जब हर कोई व्यक्ति, जो विशेष वाद्यवृंद सुने तो वह झुक जाय और स्वर्ण-मूर्ति की पूजा करे।
जो झुक कर पूजा के आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन्हें दहकती भट्टी में झौंक दिया जाएगा।
- नीचे जो विवरण दिया गया है, वह अभ्यास 3 (ओल्ड टैस्टामैंट) से है।