भाग-I धर्मिक - Page 18

प्रस्तावना 3

कुछ ऐसे यहूदी हैं जो श्रीमन् के आदेश से बेबीलोन में बसे हैं। वे हैं, शाद्राच, मेशाच, अबेद-नेगो। हे राजा! ये तेरे आदेश का पालन नहीं करते, ये तेरे देवता को आदर नहीं देते, अर्चना भी नहीं करते, तेरे द्वारा स्थापित मूर्ति को नहीं पूजते।

तब नेबूचादनेज्जार ने कुपित हो आदेश दिया कि शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो को पेश किया जाए। तब राजा के सामने लाए गए।

नेबुचादनेज्जार ने उनसे पूछाµ क्या यह सच है शाद्राच, मेशाच, अबेद-नेगो, तुम मेरे देवता को दंडवत नहीं करते, स्वर्ण-मूर्ति की पूजा नहीं करते जो मैंने स्थापित की है?

अब तुम तैयार रहो। जब तुम अमुक-अमुक वाद्यों की आवाज सुनो तो झुक कर उस मूर्ति की पूजा करो जो मैंने बनवाई है। परन्तु यदि तुम पूजा नहीं करोगे तो तुम्हें तुरंत दहकती भट्टी में झोंक दिया जाएगा फिर ऐसा कौन सा देवता है जो तुम्हें मेरे हाथों से बचा लेगा।’

शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो ने राजा से कहा, ‘हे नेबूचादनेज्जार, इस मामले में हम तेरी परवाह नहीं करते।

‘अगर ऐसा होता है तो जिस देवता की हम सेवा करते हैं, वह हमें उस दहकती भट्टी से निकाल लेगा और हे राजा, वह हमें तेरे हाथों से भी बचा लेगा।

‘तो हे राजा, यह जान लें, यदि ऐसा नहीं होता है तो हम किसी देवता की सेवा नहीं करेंगे, न ही उस स्वर्ण-मूर्ति की जो तूने स्थापित की है।

तब नेबूचादनेज्जार आगबबूला हो गया और उसके चेहरे की रंगत बदल गई। उसने आदेश दिया कि भट्टी को सात गुना गर्माएं।

फिर उसने सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से कहा कि वह शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो को बांधकर दहकती भट्टी में डाल दे।

तब उन व्यक्तियों को उनके कोट, उनकी जुराबों, उनके टोप और दूसरे कपड़ों समेत बांध कर दहकती भट्टी में डाल दिया गया।

क्योंकि राजा के आदेश थे। भट्टी भभक उठी थी। लपटों ने लोगों को झुलसा दिया, जो शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो को लाए थे।

और वे तीनों व्यक्ति शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो दहकती भट्टी में झोंक दिए गए।

क्या भारत के ब्राह्मण में इतनी अटूट आस्था और इतनी श्रद्धा अपने देवताओं में है?

बक्ले ने अपने ग्रंथ हिस्ट्री ऑफ सिविलाइजेशन में कहा हैः