परिशिष्ट-3: त्रिमूर्ति की पहेली - Page 171

परिशिष्ट - 3

त्रिमूर्ति की पहेली

जितनी सच्चाई इस बात में है कि हिंदू धर्म सम्प्रदायों का मिश्रण है, उतना ही सच यह भी है कि यह धर्म विभिन्न जातियों से मिलकर बना है। परन्तु जितना ध्यान सम्प्रदायों के अध्ययन पर दिया गया है, उससे आधा भी जातियों के अध्ययन पर नहीं दिया गया। यह जितनी दुर्भाग्य की बात है उतनी ही विचित्र भी। सम्प्रदायों ने भी भारत के इतिहास में उतनी ही भूमिका निभाई है जितनी जातयों ने। दरअसल जिस प्रकार कुछ जातियों ने भारत का इतिहास रचा है, उसी प्रकार सम्प्रदायों का भी उसमें योगदान है।

जितने सम्प्रदायों से मिलकर हिंदू धर्म बना है वे असंख्य हैं उन सबका उद्भव पता लगाना असम्भव है और इन पंथों की तुलना करना इस अध्याय की परिधि में नहीं आ सकता। हम इतना ही कर सकते हैं कि उनमें से कुछ अति महत्वपूर्ण पंथों को ही देखें और तत्संबंधी समस्याओं पर विचार करें। भारतीय इतिहास में इनमें से तीन अति महत्वपूर्ण हैं। एक वह है जो ब्रह्मा से संबद्ध है, दूसरा विष्णु से और तीसरा पंथ शिव अथवा महेश का अनुयायी है। जिन्होंने इन पंथों के इतिहास का अध्ययन किया है, निम्नांकित प्रश्न उन्हें झकझोर देंगे।

बौद्धों की रचना चुल्ल निदेश में तत्कालीन भारत के विभिन्न पंथों का संकेत दिया है। हम इन्हें सम्प्रदाय और पंथों में निम्नांकित रूप में विभाजित करते हैंः

1. पंथ

क्रम सं. सम्प्रदाय का नाम मत का तत्व

  1. आजीविका श्रावक ख्1, आजीविका ख्2,

  2. श्रावक का अर्थ है अनुशासन

  3. अपनी आजीविका के लिए विशेष नियमों का पालन करने वाला भिक्षुक

इस पहेली को पहेली सं. 11 के साथ पढ़ा जाये जो देवताओं के उत्थान तथा पतन सं संबंधित हैं। ‘त्रिमूति की पहेली’ मूल विषयसूची में नहीं है, न ही सरकार को प्राप्त पाण्डुलिपि में यह निहित थी। यह प्रति श्री एस.एस. रेगे ने उपलब्ध कराई है। - संपादक