सोलहवीं पहेली: चातुर्वर्ण्य - क्या ब्राह्मण अपनी उत्पत्ति से परिचित हैं? - Page 207

192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है, जो अस्वच्छ है, जिसने वेदों का परित्याग कर दिया है, जो पवित्र कर्म नहीं करता, परम्परा से शूद्र कहलाता है और यह (जो मैंने बताया) शूद्र के लक्षण हैं और यह एक ब्राह्मण में नहीं मिलते (ऐसा) शूद्र शूद्र ही रहेगा जो ब्राह्मण (ऐसा करता है) ब्राह्मण नहीं होगा।य्

एक स्थान को छोड़कर अन्यत्र महाभारत वर्ण-व्यवस्था की वैदिक उत्पत्ति का समर्थन नहीं करता।

V

आइये अब यह देखें कि वर्ण-व्यवस्था के संबंध में पुराण क्या कहते हैं?

हम विष्णु पुराण से आरम्भ करते हैं। चार वर्णों की उत्पत्ति पर विष्णु पुराण में तीन सिद्धांत हैं। एक में यह आरोप मनु के सिर जाता है। विष्णु पुराण का मत हैः

फ्ऐहिक अण्डज से पूर्व देव ब्रह्मा हिरण्यगर्भ, विश्व के शाश्वत नियंता, जो ब्रह्मा के तत्वरूप थे, जिसमें दिव्य विष्णु सन्निहित थे, जो ऋक, यजुस, साम, और अथर्ववेद के रूप में जाने जाते हैं, विद्यमान थे। ब्रह्मा के दाएं अंगूठे से प्रजापति दक्ष उत्पन्न हुए, दक्ष की पुत्री अदिति थी, उससे वैवस्त उत्पन्न हुआ, उससे मनु प्रकट हुआ। मनु के पुत्र थे इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यन्त, प्रमसु, नाभागनिदिष्ट, करुष और पृषघ्र। कुरुष से करुषगण महाशक्तिवान क्षत्रिय उत्पन्न हुए। निदिष्ट का पुत्र नाभाग वैश्य बना।’’

यह व्याख्या अपूर्ण है। इसमें मात्र क्षत्रिय और वैश्यों की उत्पत्ति बताई गई है। उसमें ब्राह्मण और शूद्र की उत्पत्ति की कोई व्याख्या नहीं है। विष्णु पुराण में एक और भिन्न कथन है। उसके अनुसारः

‘‘पुत्र कामना में मनु ने मित्र और वरुण की आहुति दी किन्तु होत्री पुजारी द्वारा मंत्र के गलत उच्चारण कर दिए जाने पर एक पुत्री हुई। उसका नाम इला था। तब मित्र और वरुण की कृपा से मनु से उसे सुद्युम्न नामक पुत्र का जन्म हुआ। परन्तु महादेव के कोप के कारण वह भी नारी रूप में परिवर्तित हो गया। वह नारी सोम पुत्र बुध के आश्रम के निकट विचरती रही। बुध उस पर आसक्त हो गया और उन दोनों से एक पुत्र उत्पन्न हुआ-पुरुरवा। जन्म के उपरान्त उस देवता की जो ऋक, यजुस, साम और अथर्ववेद मानस आहुति से उत्पन्न हुआ, जो यज्ञ-पुरुष का रूप है उसकी ऋषियों ने पूजा की जिन का मनोरथ था कि सुद्युम्न अपना पुरुषत्व पुनः प्राप्त कर लें। देवताओं की कृपा से इला फिर सुद्युम्न बन गया।

‘‘विष्णु पुराण के अनुसार अत्रि ब्रह्मा का पुत्र और सोम का पिता था, जिसे ब्रह्मा ने पादपों ब्राह्मणों और तारों का स्वामी बनाया। राजसूर्य यज्ञ के पश्चात् सोम मदांध हो गया और देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण कर के ले गया,