अठारहवीं पहेली
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यदि विभिन्न स्मृतियों में संकर जातियों की उत्पत्ति के विषय में हुए उल्लेखों पर ध्यान दिया जाए तो फिर विचारों में इतनी व्यापक भिन्नता क्यों है? दो जातियों के मेल से तीसरी जाति की रचना तार्किक हो सकती है परन्तु उन्हीं दो वर्णों के मिश्रण से भिन्न-भिन्न जातियां कैसे बन गईं? यही तो मनु और उनके अनुयायी कहे गए हैं। निम्नांकित तथ्यों को देखेंः
- क्षत्रिय पिता और वैश्य माता का संयोगः
क. बौधायन कहते हैं कि वह संतति क्षत्रिय हैं।
ख. याज्ञवल्क्य का कथन है कि वह महिष्य है।
ग. सूत का मत है कि यह अम्बष्ट है।
- शूद्र पिता और क्षत्रिय माता का संयोगः
क. मनु कहते हैं कि वह संतति क्षत्रिय है।
ख. उशनस के अनुसार पुलक्ष है।
ग. वशिष्ठ का मत है कि वह वेन है।
- ब्राह्मण पिता और वैश्य माता का मेलः
क. मनु के अनुसार संतति अम्बष्ट है।
ख. सूत का मत है वह अर्ध्वनापित है। उसका एक और कथन है कि
वह कुंभकार है।
- वैश्य पिता और क्षत्रिय माता का मेलः
क. मनु की दृष्टि में वह संतति मागध है।
ख. सूत का मत हैः 1. भोज, 2. म्लेच्छ, 3. शालिक, 4. पुलिंद ये एक
ही मिश्रण की जातियां हैं।
- क्षत्रिय पिता और शूद्र माता का मेलः
क. मनु का कथन है वह संतति उग्र है।
ख. सूत के अनुसार, 1. दौसंतया, 2. दौसंती और 3. शुलिका एक ही
मिश्रण से बने हैं।
- शूद्र पिता और वैश्य माता का मेलः
क. मनु का कथन है, वह संतत आयोगव है।
ख. सूत ने उसे- 1. पटट्नशाली, और 2. चक्री कहा है।