अठारहवीं पहेली: मनु का पागलपन या मिश्रित जातियों की उत्पत्ति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था - Page 231

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब एक अन्य प्रश्न पर विचार किया जाए। क्या संकर जातियों की उत्पत्ति के विषय में मनु की व्याख्याएं ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं?

आभीर से आरम्भ करते हैं। मनु कहते है कि ये ब्राह्मण पुरुष और अम्बष्ट नारी की जारज संतान है। इस संबंध में इतिहास क्या कहता है? इतिहास कहता है कि आभीर (जिसका अपभ्रंश अहीर है) एक चरवाहा जनजाति थी जो सिंध कहे जाने वाले निचले उत्तर-पश्चिमी जिलों में विचरते थे। वह एक स्वतंत्र शासक जनजाति थी और विष्णु पुराण ख्1, के अनुसार आभीरों ने मगध विजय कर लिया था एवं कई वर्षों तक वहां शासन किया।

अम्बष्टों ख्2, के विषय में मनु का कथन है कि वे ब्राह्मण पुरुष और वैश्य स्त्री की संतान हैं। पतंजलि का कथन है कि अम्बष्ट लोग अम्बष्ट देश के निवासी हैं। यह निर्विवाद है कि अम्बष्ट एक स्वतंत्र जनजाति थी। चन्द्रगुप्त मौर्य की राजसभा में यूनानी दूत मेगस्थनीज ने अम्बष्टों का उल्लेख किया है कि वह पंजाब की एक जनजाति थी जिसने भारत पर सिकंदर के आक्रमण के समय उसके साथ युद्ध किया। अम्बष्टों का महाभारत में भी उल्लेख है। उनकी राज्य-व्यवस्था और शौर्य का सम्मानजनक वर्णन है।

मनु कहते हैं कि आंध्र ख्3, द्वितीय श्रेणी की जारज संतान थी जो वैदेहक पुरुष और कारवार स्त्री से उत्पन्न बताए गए हैं, जो स्वयं जारज थे। ऐतिहासिक साक्ष्य नितांत भिन्न हैं। आंध्र वे लोग हैं जो दक्षिण के पठार के पूर्वी भाग में निवास करते हैं। आंध्रों का मेगस्थनीज ने भी उल्लेख किया है। प्लीनी द एल्डर (77 ई.) ने वर्णन किया है कि यह दक्षिणवासी एक शक्तिशाली जाति है जिसकी दक्षिण में सार्वभौम सत्ता है। उनके अधिकार में अनेक गांव हैं जिनके तीन नगरों का परकोटा है, उनकी रक्षा खाई खंदकों से होती और अपने राजा को एक लाख पैदल, दो हजार अश्वारोही और एक हजार हाथी उपलब्ध कराते हैं।

मनु के अनुसार मागध ख्4, वैश्य पुरुष और क्षत्रिय नारी से उत्पन्न जारज संतान हैं। वैयाकरण पाणिनि ने फ्मगधय् की व्युत्पत्ति भिन्न प्रकार से की है। उनके अनुसार फ्मागधय् का अर्थ है मगध देशवासी। इस समय मगध का अर्थ है बिहार के पटना और गया जनपद। ज्ञात समय से ही उन्हें स्वतंत्र सार्वभौम बताया गया है, उनका

  1. भाग 4, अध्या 24

  2. अम्बष्टों के लिए देखें जायसवाल की, हिन्दू पोलिटी, भाग 1, पृ. 73-4

  3. आंध्र के लिए देखिए, ‘अर्ली डायनैस्टिज आफ आंध्र देश’ भावराजू वेंकट कृष्ण राव। उन्हें सातवाहन भी कहा जाता है।

  4. मगध के इतिहास के लिए देखें एंसिएंट इण्डियन ट्राइब्स, अध्याय 4ः बी.सी. ला