286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की शुद्ध मदिरा पिलाई। राम के कर्मचारीगण, मांस और मधुर फल लाए।य्
वैसा ही कृष्ण और अर्जुन ने भी किया। महाभारत के उद्योग पर्व में संजय कहता हैः
फ्अर्जुन और कृष्ण, मधु से बनी मीठी और सुगंधयुक्त मदिरा पिए, पुष्पहार ध ारण किए, भव्य वस्त्राभूषण धारण किए, रत्नमंडित स्वर्ण सिंहासन पर आसीन थे। मैंने श्रीकृष्ण के पैर अर्जुन की गोद में रखे देखे हैं और अर्जुन के पांच द्रौपदी और सत्यभामा की गोद में हैं।य्
अब हम स्त्री-पुरुष के वैवाहिक संबंधों पर आते हैं। इतिहास क्या कहता है? आरंभ में आर्यों में विवाह के कोई नियम ही नहीं थे। समाज के उच्च और निम्न, दोनों वर्गों में स्वच्छंद संभोग प्रथा थी। इस संबंध में कोई प्रतिबंध नहीं थे। निम्नांकित उदाहरणों से यह स्पष्ट है।
ब्रह्मा ने अपनी स्वयं की पुत्री शतरूपा से विवाह किया। उनका पुत्र पृथुवंश का संस्थापक मनु था। उसी से इक्ष्वाकु और इला का उदय हुआ।
हिरण्यकश्यपु ने अपनी पुत्री रोहिणी से विवाह किया। पिता-पुत्री के विवाह के आम उदाहरण हैं जैसे वशिष्ठ और शतरूपा, जह्नु और जाह्नवी, सूर्य और उषा। पिता-पुत्री के बीच विवाह एक सामान्य बात थी। वह कानीन पुत्रों की मान्यता से प्रकट हैं। कानीन पुत्र का अर्थ है कुंवारी कन्या से पुत्रोत्पत्ति। विधानानुसार वे पुत्री के पिता से उत्पन्न पुत्र होते थे। स्पष्ट है कि वे उनके पिताओं द्वारा उत्पन्न पुत्र ही होने चाहिए।
ऐसे भी उदाहरण हैं कि पिता और पुत्र एक ही स्त्री के साथ सहवास करते थे। ब्रह्मा मनु के पिता थे और शतरूपा मनु की मां। यही शतरूपा मनु की पत्नी भी थी। दूसरा उदाहरण श्रद्धा का है। वह वैवस्वत की पत्नी है। मनु उनका पुत्र है परन्तु श्रद्धा मनु की पत्नी भी है। इससे संकेत मिलता है कि पिता और पुत्र एक ही स्त्री से सहवास करते थे। अपने भाई की पुत्री से विवाह करने की स्वतंत्रता थी। धर्म ने दक्ष की दस कन्याओं से विवाह किया जबकि दक्ष और धर्म भाई-भाई थे। चचेरी बहन से विवाह का भी प्रचलन था। कश्यप की तेरह पत्नियां थीं और वे सभी दक्ष की पुत्रियां थीं। दक्ष कश्यप के पिता मारीचि का भाई था।
ऋग्वेद में यम और यमी का प्रसंग आया है। यह प्रसंग भी बहुत कुख्यात है जिसमें भाई-बहन के विवाह संबंधों पर प्रकाश पड़ता है क्योंकि यम ने यमी के साथ संभोग करने से इंकार कर दिया। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उस युग में ऐसा होता नहीं था।
महाभारत के आदिपर्व में एक वंशावली दी गई है, जो ब्रह्मदेव से आरम्भ होती है। इस वंशावली के अनुसार ब्रह्मा के तीन पुत्र थे, मारीचि, दक्ष और ब्रह्मा तथा एक पुत्री, जिसका नाम दुर्भाग्य से वंशावली में नहीं है। इसी वंशावली में कहा गया है कि दक्ष की बहन ही हुई। उन दोनों से 50-60 पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। भाई-बहन के विवाह के