तेईसवीं पहेली: कलियुग - ब्राह्मणों ने इसे अनंत क्यों बनाया? - Page 302

तेइसवीं पहेली

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अन्य उदाहरण भी उपलब्ध हैं। वे हैं-पूशान और उसकी बहन अच्छोद और अनावसु, पुरुकुत्स और नर्मदा, विप्राचिती और सिंहिका, नहुष और विराज, शुक्र-उशनस और गो, अंशुमान और यशोदा, दशरथ और कौशल्या, राम और सीता, शुक और पीवरी, द्रौपदी और प्रश्नी। ये भाई-बहन के विवाह थे।

निम्नांकित उदाहरण प्रकट करते हैं कि माता और पुत्र के बीच भी सहवास होता था। पूशान और उसकी मां, मनु और शतरूपा और मनु और श्रद्धा का उदाहरण है। दो अन्य बातों की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। अर्जुन और उर्वशी और अर्जुन और उत्तरा। उत्तरा का अभिमन्यु से विवाह हुआ था, जो अर्जुन का पुत्र था। उस समय उसकी आयु केवल 16 वर्ष की थी। उत्तरा का अर्जुन के साथ सम्पर्क था। वह उसे नृत्य-संगीत सिखाता था। यह बताया गया है कि उत्तरा के मन में अर्जुन के प्रति प्रेमांकुर थे और महाभारत कहता है इन प्रेम-संबंधों के कारण ही उनका प्राकृतिक विवाह हुआ। महाभारत यह नहीं कहता कि उनका विधिवत विवाह हुआ। यदि प्राकृतिक विवाह हुआ तो कहा जा सकता है कि अभिमन्यु ने अपनी माता से विवाह किया। इस संबंध में अर्जुन-उर्वशी प्रकरण और भी ठोस उदाहरण है।

इन्द्र, अर्जुन का वास्तविक पिता था। उर्वशी, इन्द्र की रखैल थी। इस प्रकार वह अर्जुन की मां के रिश्ते में थी। यह अर्जुन की शिक्षिका थी और उसे नृत्य और संगीत सिखाती थी। उर्वशी अर्जुन पर मोहित हो गई। उसके पिता इन्द्र की सहमति से उसने अर्जुन से सम्भोग करने के लिए निवेदन किया। अर्जुन ने सहवास से यह कहकर इंकार कर दिया कि वह उसकी माता के समान है। ऐतिहासिक रूप से अर्जुन की अस्वीकृति के स्थान पर उर्वशी का व्यवहार अधिक महत्वूर्ण है। उसके दो कारण हैं। उर्वशी द्वारा इन्द्र की सहमति से, अर्जुन से प्रणय निवेदन करना इस बात का परिचायक है कि उस समय ऐसा हुआ करता था। दूसरी बात यह है कि उर्वशी अर्जुन से कहती है कि यह तो एक पुराना रिवाज है और अर्जुन के पूर्वजों ने ऐसे आमंत्रण को निःसंकोच स्वीकार किया है।

सहवास के लिए सगोत्र का ध्यान न रखने की निम्नांकित कहानी से बड़ा उदाहरण मिल ही नहीं सकता, जो हरिवंश पुराण के दूसरे अध्याय में समाविष्ट है। इसके अनुसार सोम दस पिताओं का पुत्र था, जो बहुपतित्व-प्रथा का संकेत है। उनमें से एक का नाम था-प्रल्हेत। सोम की एक पुत्री थी-मरीशा। सोम के दस पिता और स्वयं सोम उसके साथ सहवास करते थे। यह एक ऐसा उदाहरण है, जब किसी स्त्री के पितामह और पिता उसके पति भी थे, जो अपने पितामहों और पिता की पत्नी थी। दक्ष प्रजापति सोम का पुत्र था और उसने अपनी 27 पुत्रियाँ, अपने पिता को संतति-वृद्धि के लिए ब्याह दीं। ‘हरिवंश’ के तीसरे अध्याय में लेखक कहता है कि दक्ष ने अपनी एक बेटी का विवाह अपने ही पिता ब्रह्मा से कर दिया। उससे एक पुत्र नारद उत्पन्न हुआ। यह सपिण्ड स्त्री-पुरुषों के सहवास के प्रसंग हैं।