परिशिष्ट-1
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रावण ने सीता का हरण कर लिया और उन्हें अपनी पत्नी बनाने की इच्छा से अपने महल में ले गया। तब राम ने लक्ष्मण को सीता की खोज आरम्भ करने को कहा। इस बीच उन्हें वानर जाति के दो प्रमुख सुग्रीव और हनुमान मिले। उन्होंने उनसे मैत्री कर ली। उनकी सहायता से सीता का पता मिल गया। उन्होंने लंका को कूच किया। युद्ध में रावण को हराया और सीता को मुक्त करा लिया। सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या वापस आ गए। उस समय तक चौदह वर्ष की अवधि बीत चुकी थी और कैकेयी की शर्त पूरी हो चुकी थी। परिणामस्वरूप भरत ने राज त्याग दिया अैर राम अयोध्या के राजा बन गए।
वाल्मीकि के अनुसार रामायण की कथा का सार यही है।
इस कहानी में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे राम को पूजनीय बनाया जा सके। यह मात्र एक आज्ञापालक और कर्त्तव्यपालक व्यक्ति हैं। परन्तु वाल्मीकि को राम में कुछ विलक्षण लगा, तभी उन्होंने रामायण की रचना की।
वाल्मीकि ने नारद से निम्नांकित प्रश्न किए ख्1, ः
फ्हे नारद! मुझे बताओ कि वर्तमान समय में अत्यधिक आज्ञाकारी व्यक्ति पृथ्वी पर कौन हैं?य्
तब वे विस्तार से कहते हैं कि अत्यधिक आज्ञाकारी व्यक्ति से उनका आशय क्या है? वह ऐसे बताते हैंः
फ्बलशाली, जो धर्मज्ञ हो, जो कृतज्ञता, सत्य को जानता हो, धर्मपालन के लिए जो विपदा में भी स्वार्थ त्यागने को तत्पर हो, व्यवहार में सद्गुण हों, सभी के हितों की रक्षा करता हो, आत्मसंयमी और सुदर्शन हो, क्रोध का दमन कर सके, अनुकरणीय हो, अन्य की सम्पन्नता से ईर्ष्या न करे और युद्ध में देवताओं को भी दहला दे।य्
नारद ने सोचने के लिए समय मांगा और काफी सोच-विचार के पश्चात् उन्होंने कहा, जिस व्यक्ति में ये सभी गुण हैं, वह केवल दशरथ-पुत्र राम हैं।
गुणों के कारण ही राम को यह पद प्राप्त है।
परन्तु क्या राम देवतत्व के योग्य हैं? जो उन्हें देववत पूजनीय मानते हैं, उन्हें निम्नांकित तथ्यों पर विचार करना चाहिए।
राम का जन्म ही अप्रत्याशित था और यह सोचा जा सकता है क सच छिपाने का यह एक प्रतीक बना दिया गया कि उनका जन्म (पिण्ड) खाने से हुआ था, जो ऋष्य शृंग ख्1, ने तैयार किया था। यद्यपि दोनों पति-पत्नी नहीं थे फिर भी उनका जन्म यदि बदनामी की बात नहीं है तो भी अप्राकृतिक तो है ही।
- बालकाण्ड सर्ग 1, श्लोक 1-5