परिशिष्ट-I: राम और कृष्ण की पहेली - Page 327

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

परिशिष्ट-1

राम और कृष्ण की पहेली

राम वाल्मीकि कृत रामायण के नायक हैं। रामायण का कथानक बहुत संक्षिप्त है, साथ ही यह सरल भी है। इसमें कोई सनसनीखेज बात नहीं है।

राम दशरथ के पुत्र हैं, जो आधुनिक बनारस के अयोध्याराज के शासक थे। दशरथ की तीन पत्नियां थीं। कौशल्या, कैकेयी तथा सुमित्रा तथा कई सौ रखैलें थीं। कैकेयी का दशरथ से विवाह, कुछ शर्तों पर हुआ था, जो विवाह के समय निश्चित नहीं की गई थीं और दशरथ वचनबद्ध थे कि कैकेयी जब कोई शर्त उनके सम्मुख रखेगी, वह उन्हें माननी होगी। दशरथ दीर्घकाल तक निःसंतान रहे। वे राज का उत्तराधिकारी पाने के लिए अधीर थे। यह देखकर कि उसकी तीनों रानियों में से किसी से भी पुत्र उत्पन्न होने की आशा नहीं है, उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ करने का निश्चय कया और ऋष्य-शृंग को यज्ञ हेतु बुलाया। ऋषि ने यज्ञ सम्पन्न करके पिंड नामक वस्तु तैयार की और दशरथ की तीनों पत्नियों को खाने के लिए दी। पिण्ड खाकर तीनों रानियां गर्भवती हो गईं और पुत्रों को जन्म दिया- कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत और सुमित्रा से दो पुत्र लक्ष्मण और शत्रुघ्न उत्पन्न हुए। बाद में राम का सीता से विवाह हो गया। जब राम वयस्क हो गए तो दशरथ ने राम को राजपाट सौंपकर परिजनों को त्यागने का निश्चय किया। जब यह बात चल रही थी तो कैकेयी ने प्रश्न उठाया के अब वह उस वचन की पूर्ति चाहती है जो विवाह के समय दशरथ ने दिया था। उससे पूछे जाने पर कैकेयी ने बताया कि राम के स्थान पर उसके पुत्र को राज दिया जाए और राम को 12 वर्ष का वनवास। दशरथ बहुत हील हुज्जत के बाद मान गए। भरत अयोध्या के राजा हो गए और राम अपनी पत्नी सीता तथा सौतेले भाई लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान कर गए। जब वे वनों में रह रहे थे तो लंकाधिपति

यह पक्की जिल्द की फाइल में रखी 49 पृष्ठों की टंकित प्रति है जिसके साथ ‘सिम्बल्स आफ हिंदुइज्म’ की पाण्डुलिपि भी थी। मूल विषयसूची में यह पहेली नहीं दी गई। इसीलिए इसे परिशिष्ट के रूप में शामिल किया गया है। - संपादक

टिप्पणी इस अध्याय में व्यक्त विचारों में आवश्यक नहीं कि सरकार की सहमति हो।