तीसरी पहेली: वेदों की उत्पत्ति पर अन्य शास्त्रों के साक्ष्य - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऐसा सोचते हुए भगवान के मुख से ओम का उच्चारण हुआ। इस शब्द की समस्त पृथ्वी, वायु और आकाश में गूंज ध्वनित हुई। इस मस्तिष्क के परम तत्व को जब देवों के देव बार-बार उच्चारित कर रहे थे, तब उनके हृदय से वषट्कार प्रकट हुआ। इसके बाद पृथ्वी, वायु, अंतरिक्ष और स्वर्ग की सारभूता ‘‘भूः, भुवः, स्वः’’ महास्मृतिमयी व्याहृतियां जन्मीं। फिर श्रेष्ठ देवी गायत्री पैदा हुई जो चौबीस अक्षरों से युक्त है। भगवान ने उस पद का स्मरण करके सावित्री मंत्र को प्रकट किया। फिर प्रजापति ने ब्रह्मयुक्त कर्म के द्वारा ऋव्Q, साम, अथर्व और यजु नामक चारों वेदों का प्रादुर्भाव किया।’’

VI

इस प्रकार वेदों की सृष्टि के विषय में हमारे सामने ग्यारह भिन्न-भिन्न व्याख्याएं हैं- 1. पुरुष रहस्यात्मक यज्ञ से उत्पन्न हुए, 2. स्कंभ पर आधारित है, 3. उससे विलगित बालों और मुख से निकले, 4. इन्द्र ने उत्पन्न किए, 5. काल से जन्मे, 6. अग्नि, वायु और सूर्य से उत्पन्न हुए, 7. प्रजापति और जल से पैदा हुए, 8. ब्रह्मा की श्वांस से निकले, 9. भगवान ने मानस सागर से खोदकर निकाला, 10. ब्रह्मा की दाढ़ी के बालों से निकले, 11. वाच का विस्तार है।

एक सीधे से सवाल को जो एक पहेली है जवाबों के बियाबान में भटका दिया गया है। इन प्रश्नों के उत्तर ब्राह्मणों के गढ़े हैं। वे एक ही वैदिक सिद्धांत के माने वाले हैं। प्राचीन धार्मिक कहानियों के ये ही गढ़ने वाले हैं। इस सीधे से सवाल के ऐसे अजीबोगरीब और अव्यवस्थित जवाब क्यों दिए गए?