परिशिष्ट-1
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राज-परिवार से थे। उनका अपना राज था जिसकी राजधानी किष्किंधा थी। जब बाली राजा था तो उसका मायावी नामक राक्षस से युद्ध छिड़ा हुआ था। द्वंद्वयुद्ध में मायावी अपनी जान बचाकर भागा और एक गहरी खोह में घुस गया। बाली ने सुग्रीव से कहा कि वह गुफा के भीतर जा रहा है, वह बाहर गुफा के मुंह पर प्रतीक्षा करे। कुछ देर बाद गुफा में से रक्त की धारा फूटी। सुग्रीव ने अनुमान लगाया कि बाली मायावी के हाथों मारा गया। किष्किंधा आकर उसने स्वयं को राजा घोषित कर दिया और हनुमान को अपना मंत्री बना लिया।
वास्तव में बाली मरा नहीं था बल्कि बाली ने मायावी को मार गिराया था। बाली गुफा से बाहर आया और देखा तो सुग्रीव वहां नहीं था। वह किष्किंधा आया तो यह देखकर चकित रह गया कि सुग्रीव राजा बना बैठा है। स्वाभाविक था कि इस दगाबाजी को देखकर बाली आगबबूला हो उठता, क्योंकि इसका कारण भी स्पष्ट था। सुग्रीव को अटकल पर ही निर्भर नहीं करना था। उसे देखना था कि बाली मृत है या जीवित। दूसरे बाली का एक पुत्र था अंगद। वह बाली का वैध उत्तराधिकारी था। उसे राजा बनाया जाना चाहिए था। सुग्रीव ने कुछ नहीं किया। यह विद्रोह का स्पष्ट मामला था। बाली ने सुग्रीव को खदेड़ दिया और गद्दी पर बैठ गया। दोनों भाई जानी दुश्मन बन गए।
यह घटना तभी घटी थी, जब रावण ने सीता का हरण किया था। राम और लक्ष्मण उनकी खोज कर रहे थे। सुग्रीव और हनुमान किसी मित्र की तलाश में थे, जो उन्हें बाली से राज्य वापस दिला सके। दोनों पक्षों में संयोगवश भेंट हो गई। जब दोनों ने एक-दूसरे की कठिनाइयों को सुना तो उनके बीच एक समझौता हुआ। यह सहमति हुई कि राम बाली का वध करने और सुग्रीव को किष्किंधा-राज दिलवाने में मदद करें। यह भी सहमति हुई कि सुग्रीव और हनुमान राम को सीता वापस दिलाने में सहायता करेंगे। बाली वध की योजना को कार्यरूप देने के लिए सुग्रीव अपने गले में माला पहन ले, जिससे द्वंद्वयुद्ध के समय सरलता से पहचाना जा सके। राम किसी वृक्ष की आड़ में छिप जाए और वहां से तीर चलाकर बाली का काम तमाम कर दें। तद्नुसार द्वंद्व आयोजित किया गया। जब युद्ध हो रहा था तो सुग्रीव के गले में माला थी। वृक्ष के पीछे छिपे राम ने निशाना साधा। सुग्रीव किष्किंधा का राजा बन गया। बाली की हत्या राम के चरित्र पर बहुत बड़ा धब्बा है। यह एक ऐसा अपराध था, जो एकतरफा था क्योंकि बाली का राम से कोई विवाद नहीं था। यह कायरता भी थी क्योंकि बाली निहत्था था। यह एक सुनियोजिता और सुविचारित हत्या थी।
अब यह देखें कि उन्होंने अपनी ही पत्नी सीता के साथ क्या व्यवहार किया? जब सुग्रीव और हनुमान ने सेना एकत्र कर ली तो राम ने लंका पर आक्रमण कर दिया। यहां भी राम ने वही चाल चली जो बाली और सुग्रीव के बीच चली थी। उन्होंने