316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस शर्त पर रावर्ण के भाई विभीषण से सहायता ली कि रावण और उसके पुत्रों को मार विभीषण को राज दे दिया जाएगा। राम ने रावण और पुत्र इन्द्रजीत का वध कर दिया। युद्ध समाप्ति पर राम ने सबसे पहला कार्य रावण की विधिवत अंतयेष्टि करके किया। इसके पश्चात् विभीषण का राज्याभिषेक कराया गया। तब उन्होंने हनुमान को सीता के पास भेजा और सूचित कराया कि वे, लक्ष्मण और सुग्रीव सकुशल हैं और उन्होंने रावण का संहार कर दिया है।
रावण पर विजय प्राप्त करने के उपरांत उन्हें सीधे सीता के पास जाना चाहिए था। उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्हें राजतिलक की ज्यादा चिंता है, सीता की नहीं। यहां तक कि राजतिलक के पश्चात् भी वे स्वयं न जाकर हनुमान को भेजते हैं। और वह संदेश क्या देते हैं? वे हनुमान को सीता को लाने के लिए नहीं कहते। वे सिर्फ यह खबर भेजते हैं कि वे स्वस्थ और प्रसन्न हैं। यह सीता है जो हनुमान से राम से मिलने की बात कहती है। राम सीता से मिलने गए ही नहीं जो उनकी पत्नी थी, जिसका रावण ने अपहरण कर लिया था और उसे 10 माह कैद में रखा था। सीता उनके पास लाई गई। जब सीता राम से मिली तो राम ने क्या कहा? इस बात पर कोई यकीन नहीं करेगा कि आदमी में साधारण मानवीय दया भी न हो। जो दुख में घिरी अपनी पत्नी को कठोर वचन बोलेगा जैसे कि राम ने बोले जब वह लंका में उससे मिले। वाल्मीकि साधिकार रामायण में कहते है।ः जैसे कि राम ख्1, ने कहाः
फ्मैंने अपने शत्रु, तुम्हारे अपहर्ता को युद्ध में परास्त कर तुम्हें इनाम के तौर पर पाया है। मुझे मेरा सम्मान मिल गया और दुश्मन को हरा दिया है। मुझे परिश्रम का फल मिल गया है तथा लोगों ने मेरी सैनिक शक्ति देखी। मैं अपनी अपकीर्ति मिटाने आया था। मैंने तुम्हारे लिए यह कष्ट थोड़े ही उठाया है।य्
राम के सीता के प्रति किए गए इस व्यवहार से बड़ी क्या कोई और भी कठोरता हो सकती है? वे यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहाः
फ्मुझे तुम्हारे चरित्र पर संदेह है। रावण ने तुम्हारा शीलभंग किया होगा। मुझे तुम्हें देखते ही उबाल आ रहा है। मैं तुम्हें स्वतंत्र करता हूं। जहां मन करे जाओ। हे जनक सुता! मुझे तुमसे कोई लेना-देना नहीं। मैंने तुम्हें जीता, इसका मुझे संतोष है। यही मेरा लक्ष्य था। मैं यह नहीं सोच सकता कि तुम जैसी सुन्दर नारी से रावण ने आनन्द नहीं लूटा होगा।य्
स्वाभाविक है कि सीता उन्हें पतित और क्षुद्र कहती और स्पष्ट रूप से कहती कि जब हनुमान आए थे, यदि तभी उन्हें यह संदेश भिजवा दिया गया होता कि अपहरण के कारण राम ने उन्हें मन से निकाल दिया है तो वे आत्महत्या कर लेतीं और उन्हें
- युद्धकाण्ड सर्ग. 115, श्लोक 1-23