छठी पहेली
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यम कहता है-‘‘हे यमी, मैं तुम्हारे शरीर से अपना शरीर नहीं मिलाना चाहता। जो अपनी बहिन से सम्भोग करता है उसे लोग पापी कहते हैं। हे सुंदरी! मेरे अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष से आमोद-प्रमोद करो। तुम्हारा भाई यह काम नहीं करना चाहता।’’
यमी बोली-‘‘मुझे खेद है कि तुम बहुत कमजोर हो। मैं तुम्हारे मन को नहीं समझ पा रही हूं। रस्सी जिस प्रकरा घोड़े को बांधती है, और लता जिस प्रकार वृक्ष से लिपट जाती है, उसी प्रकार अन्य स्त्री तुम्हारा आलिंगन करती है।’’
यम ने कहा-‘‘हे यमी! लता जिस प्रकार वृक्षर को लपेटती है, उसी प्रकार तुम मेरे अतिरिक्त अन्य पुरुष का आलिंगन करो। तुम उस पुरुष का मन जीतने की कामना करो और वह पुरुष तुम्हारा मन जीतने की इच्छा करे। तुम उसी के साथ कल्याण् ाकारी सहवास करो।’’
‘राक्षस-हंता अग्नि हमारी प्रार्थना स्वीकार करे। दुरात्मा से त्राण दें जो व्याधि के रूप में तेरे भ्रूण को आक्रांत कर सके, जो अंतः काष्ठ की भांति तेरे गर्भाशय को निरस्त करे।’’
‘‘अग्नि देव हमारी अर्चना को स्वीकार करें, नरभक्षियों को नष्ट करें जो व्याधि के रूप में तेरे गर्भाशय पर दुष्प्रभाव डालते हैं, जो अंतः काष्ठ की भांति तेरी कोख को रिक्त कर सकते हैं।’’
‘‘दुरात्मा से हमें त्राण दें जो पुंसत्व का हरण करते हैं। गर्भ ठहरते ही उसे विस्थापित करते हैं जो नवजात शिशु का हनन करना चाहते हैं।’’
‘‘हमें दुरात्मा से त्राण मिले जो तेरी जंघा को विलग करता है जो पति-पत्नी के बीच बाधा बनता है जो तेरी कोख में प्रविष्ट होता है। बीज हरण करता है। हमें उस दुरात्मा से त्राण मिले जो भ्राता, पति अथवा पति इतर प्रियतम के रूप में तुझ तक पहुंचता है और गर्भपात करना चाहता है।’’
‘‘हमें दुरात्मा से त्राण मिले जो तुझे नींद या अंधेरे में छल लेता है। तुझ तक आकर गर्भपात कर देता है।’’
ऋग्वेद के कुछ मंत्रों अथवा प्रार्थनाओं को लेते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैंः
- हे वायु देव! तू कितना रूपवान है हमने मसालों से सोम रस बनाया है। आ,
इसका पान कर और हमारी प्रार्थना स्वीकार कर -- ऋग्वेद I . 1.2.1
- हे इन्द्र देव! हमारे संरक्षण हेतु सम्पदा प्रदान कर। तेरे द्वारा प्रदत्त सम्पदा हमें