ग्यारहवीं पहेली: ब्राह्मणों ने देवताओं का उत्थान-पतन क्यों किया? - Page 95

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘मूलतः सभी देव समान थे उन सबके समान होने से, सबके विमल होने से तीनों की चाह थी। ‘‘हम श्रेष्ठ बनें,’’ वे हैं अग्नि, इन्द्र और सूर्य।

‘‘3. मूलतः अग्नि की शिखाएं ऐसी नहीं थीं जैसी वर्तमान में हैं। उन्होंने इच्छा

की कि ये शिखाएं मुझ में हों’’ उन्होंने इस को देखा, उसे ग्रहण किया और तब

से उनकी शिखाएं उनमें समाहित हो गईं।

  1. ‘‘मूलतः इन्द्र में इतना बल नहीं था आदि (उपरोक्तानुसार)

  2. ‘‘मूलतः सूर्य में उतनी कांति नहीं थी आदि’’

कब तक ये तीन देव उच्चता की उसी दशा में बने रहे, यह बताना कठिन है। परन्तु निःसंदेह कालांतर में स्थिति बदल गई। यह चुल्ल निदेश के प्रसंग से स्पष्ट है। चुल्ल निदेश बौद्ध धर्म की रचना है। इसका रचनाकाल... (अधूरा छोड़ दिया गया)

चुल्ल निदेश में उन सम्प्रदायों की सूची दी गई है जो उस समय भारत में प्रचलित थे। इनका पंथ और उपासना के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। वे इस प्रकार हैंः-

1. पंथ

क्रम सं. सम्प्रदाय का नाम

  1. आजीविका श्रावक ख्1, आजीविका ख्2,

  2. निगंठ श्रावक निगंठ ख्3,

  3. जटिल श्रावक जटिल ख्4,

  4. परिव्राजक श्रावक परिव्राजक ख्5,

  5. अवरुद्ध श्रावक अवरुद्ध

  6. श्रावक का अर्थ है शिष्य।

  7. जीविकोपार्जन विषयक विशेष नियमों का पालन करने वाला भिक्षु।

  8. हर प्रकार के बंधन-बाधाओं से मुक्त भिक्षु।

  9. सर की जटाओं को बांधने वाले भिक्षु।

  10. समाज से विरक्त भिक्षु।