ग्यारहवीं पहेली: ब्राह्मणों ने देवताओं का उत्थान-पतन क्यों किया? - Page 94

ग्यारहवीं पहेली

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चाहे कितनी भी सीमाएं हों हमारी दृष्टि में बहुदेववाद प्रत्येक देवता में अपरिहार्य

होना चाहिए। प्रत्येक देव में देवों की विशेषता होनी चाहिए। कवि की दृष्टि से

अन्य देव लुप्त हो जाते हैं और केवल वही रह जाता है जो उपासक का मनोरथ

पूरा करे।’’

‘‘कोई ऐसा देव नहीं है जो अन्य का अधीन हो।’’

एक समय यही सत्य था। देवताओं के प्रंति पुराने दृष्टिकोण में परिवर्तन आया। क्योंकि अनेक वेद मंत्रों में ऐसा उल्लेख है जिनमें कुछ देवों को सर्वोच्च और सर्वशक्तिमान समझा जाने लगा था।

द्वितीय मंडल के प्रथम मंत्र में अग्नि को विश्व-नियंता कहा गया है। परमात्मा, मेधावी राजा, पिता, भ्राता, पुत्र और मानव-मित्र बताया गया है। अपितु अन्यों की शक्तियां, और नाम भी विशेष रूप से उसे प्रदान किए गए हैं।

फिर अग्नि के ऊपर भी दूसरे देवता का स्थान हो गया। वह है इन्द्र। इन्द्र को वेद मंत्रों और साथ-साथ ब्राह्मणों में सर्वोच्च शक्तिशाली देवता कहा गया और दसवें मण्डल में कहा गया है। विश्वमद् इन्द्र उत्तरहः ‘‘इन्द्र सर्वोच्च है।’’

फिर तीसरा देवता शिखर पर पहुंचा। वह सोम है। सोम के विषय में कहा गया है कि वह जन्मजात महान था और उसने सभी को पराजित किया। वह विश्व का एक छत्र राजा कहलाता था। वह मनुष्यों के जीवन का विस्तार कर सकता था। एक मंत्र में कहा गया है कि वह स्वर्ग और धरती, अग्नि, सूर्य, इन्द्र और विष्णु का स्रष्टा था। फिर सोम भी विस्मृत हुआ और चौथे देवता की उपासना होने लगी। वह वरुण था। सभी देवताओं में सर्वोच्च था। दैवी और परमशक्ति का गुणगान करने के लिए मानव अभिव्यक्ति और क्या हो सकती थी जो वैदिक कवि ने वरुण के लिए कीः ‘‘तू स्वर्ग और मृत्युलोक का स्वामी है।’’ या एक अन्य मंत्र में कहा गया है (27.10) तू सब का स्वामी है, उनका जो देवता है और ‘‘उनका भी, जो मनुष्य हैं।’’

इससे स्पष्ट है कि 33 वैदिक देवों में चार देवता अग्नि, इन्द्र, सोम और वरुण प्रधान थे। दूसरों का देवत्य भी विद्यमान रहा। परन्तु इन चार का स्थान सर्वोच्च था। कालांतर में विभिन्न देवों की तुलना में शतपथ ब्राह्मण के काल में एक और परिवर्तन आया। एक नया देवता उभरा। सोम और वरुण के नाम प्रधान देवताओं में से नदारद हो गए जबकि अग्नि और इन्द्र मौजूद रहे। एक और देवता का नाम सामने आया वह था सूर्य। परिणाम यह हुआ कि अग्नि, इन्द्र, सोम और वरुण के स्थान पर प्रमुख देवता हो गए अग्नि, इन्द्र और सूर्य। यह शतपथ ब्राह्मण का प्रमाण है जो कहता हैः