ग्यारहवीं पहेली: ब्राह्मणों ने देवताओं का उत्थान-पतन क्यों किया? - Page 97

82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. ब्रह्मा वृत्तिका ब्रह्मा

  2. देव वृत्तिका देव

  3. दिशा वृत्तिका दिशा

शतपत ब्राह्मण के समय से चुल्ल निदेश तक प्रतिस्थापित तुलनात्मक स्थिति निम्नांकित थीः

  1. प्रथम, यह कि चुल्ल निदेश के समय अग्नि, सूर्य और इन्द्र की उपासना जारी थी। 2. दूसरे यह कि अग्नि, सूर्य और इन्द्र की उपासना यद्यपि जारी थी कन्तु उनकी श्रेष्ठता लुप्त हो गई थी_ वैसे काफी अन्य उपासनाएं होने लगीं और लोग उनकी ओर आकर्षित हुए। 3. तीसरे, नई पूजा परम्पराओं में काफी बाद में दो बहुत प्रमुख हुईं, वह हैं वासुदेव कृष्ण और ब्रह्मा। 4. चौथे, विष्णु, शिव और राम अज्ञात थे।

चुल्ल निदेश के बाद अब स्थिति क्या है? इस समय तीन प्रतिस्थापनाएं हैं। प्रथम, अग्नि, इन्द्र, ब्रह्मा की पूजा लुप्त हो गई, द्वितीय कृष्ण की स्थिति पूर्ववत रही_ तृतीय_ विष्णु, शिव और राम की नई पूजा-परम्पराएं शुरू हुईं जो चुल्ल निदेश तक विद्यमान थीं। इससे तीन प्रश्न उभरकर आते हैंः प्रथम यह है कि अग्नि, इन्द्र, ब्रह्मा और सूर्य की पुरानी पूजा-परम्पराएं क्यों लुप्त हो गईं? इन देवों की पूजा क्यों बंद कर दी गई? दूसरा प्रश्न यह है कि कृष्ण, राम, शिव और विष्णु की नई पूजा-प्रवृतियों में किन परिस्थितियों में वृद्धि हुई। तीसरा यह कि इन नए देवताओं कृष्ण, राम, शिव और विष्णु में तारतम्य क्या है?

पहले प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिलता। ब्राह्मण साहित्य कोई संकेत नहीं देता कि ब्राह्मणों ने अग्नि, इन्द्र, सूर्य और ब्रह्मा की उपासना क्यों बंद कर दी। इसका तो कुछ स्पष्टीकरण है भी कि ब्रह्मा की उपासना क्यों बंद हुई। इसका कारण ब्राह्मणों के साहित्य में ब्रह्मा के माथे पर लगाया गया कलंक है। लांछन है कि उन्होंने अपनी पुत्री के साथ बलात्कार किया, इसलिए उन्हें पूजा और भक्ति का पात्र नहीं रहने दिया गया। इस कलंक में कितनी भी सच्चाई रही हो परन्तु दो कारणों से ब्रह्मा का पूजा-निषेध पर्याप्त तर्क नहीं है। पहले तो यह क उस समय ऐसा आचरण कोई अनहोनी बात नहीं थी। दूसरा कारण यह है कि कृष्ण ने ब्रह्मा की अपेक्षा इससे भी बड़ी अनैतिकताएं कीं किन्तु उनकी उपासना होती है।

चलिए, ब्रह्मा की पूजा-निषेध का तो अनुमान लगाया जा सकता है, किन्तु अन्य देवों की उपासना बंद हो जाने का तो कोई कारण ही नहीं मिलता। अग्नि, इन्द्र, सूर्य और ब्रह्मा की पूजा अप्रचलित होना इस प्रकार एक रहस्य है। यहां इस रहस्य की