परिशिष्ट - Page 185

170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक अपील

महात्मा गांधी ने ही हमें यह बोध कराया कि हम ग्रामों में निर्धन हरिजनों के साथ भारी अन्याय कर रहे हैं। उनके साथ निम्न जातियों तथा दास जैसा व्यवहार कर रहे हैं। यदि वह न होते तो देश के विभिन्न भागों के हरिजन सवर्ण हिंदुओं के असह्य अत्याचारों से तंग आकर हिंदुओं से अलग हो जाते। आज से 21 वर्ष पूर्व महात्मा गांधी ने पूना में ऐतिहासिक अनशन किया था। उद्देश्य था, हरिजनों के समर्थन में जन-जागरण हो। इसमें संदेह नहीं कि पिछले दशकों में भारी जन-जागरण हुआ है और आज हरिजन आंदोलन के प्रति जन-सहानुभूति है। सरकार वचनबद्ध है कि वह हरिजनों की सभी प्रकार की सामाजिक तथा नागरिक असुविधाओं को दूर करेगी। वह हरिजनों की प्रतिष बढ़ाने के सभी शांतिपूर्ण तथा वैध प्रयासों को पूर्ण सहयोग प्रदान भी कर रही है। लेकिन हमें स्वीकार करना होगा कि गांवों में आज भी हरिजनों के प्रति काफी विद्वेष और पूर्वाग्रह हैं। हम सभी समाज सेवकों से अपील करते हैं कि वे ग्रामों में सवर्ण हिंदुओं के हृदय में परिवर्तन लाएं, ताकि अब और आगे हरिजनों को एक अलग अस्पृश्य वर्ग के रूप में न माना जाए। हम सभी नेताओं से अपील करते हैं कि वे अस्पृश्यता को मिटाने के लिए जी-जान से जुट जाएं और प्रयास करें कि हरिजनों को हिंदू समाज का अभिन्न अंग माना जाए।

दक्षिणी रेंज,  स्वामी आनंद तीर्थ, एम. ए. प्रधान कार्यालय, मैलूर  प्रादेशिक अधिकारी

 अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ