परिशिष्ट - Page 184

अलग-थलग स्थिति की समस्या

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कारुगाकोट्टै में घटीं। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इन स्थानों का दौरा किया। कुछ स्थानों में हरिजनों को चावड़ी पर बुलाया गया और कोट्टागुडी, किरारीपट्टी और पुल्लिपट्टी की भांति चेतावनी दी गई। अधीनस्थ पुलिस अधिकारी आमतौर पर सवर्ण हिंदुओं का समर्थन करते हैं। इस प्रकार सवर्ण हिंदुओं को अपना जबरा कानून लागू करने की छूट मिल जाती है, ताकि वे हरिजनों को उनके दास होने का बोध करा सकें।

क्या हम इसे सहन कर सकते हैं

हमारे सामने सवाल यह है कि जब हम जलियांवाला बाग में हुए डायर के अत्याचारों के विरुद्ध विद्रोह कर चुके हैं, तो आजकल सरेआम हरिजनों को जिस घोर अपमान और मनमानें अवैध अत्याचार का शिकार बनाया जा रहा है, क्या हम उसे सहन कर सकते हैं? जलियांवाग बाग में तो अत्याचार विदेशी नौकरशाहों ने उन नर-नारियों पर ढाए थे, जो एक सभा के लिए वहां एकत्र हुए थे। यहां उसी प्रकार के जुल्म हमारे ग्रामवासियों ने उन चंद हरिजन चुवकों पर किए, जिन पर चावड़ी में मुकदमा चलाया गया जिसका उद्देश्य यह था कि आम हरिजन के हृदय में आतंक का हौआ बिठा दिया जाए।

सरकार को क्या करना होगा

ग्राम में सरकार ने ग्राम पंचायतों की स्थापना की है। उनमें निर्वाचित सदस्य होते हैं, जिनमें हरिजन भी होते हैं। तो क्या कारण है कि सरकारी मान्यता प्राप्त इन पंचायतों के समानांतर सवर्ण हिंदुओं को उनके चावड़ी न्यायालय करने की छूट दी जाए। ग्रामों में निर्धन पिछ़ड़े वर्ग की जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के मार्गों में ये चावड़ी न्यायालय गंभीर बाधाएं हैं। ग्रामों में हरिजनों का उद्धार अथवा मुक्ति तभी हो सकती है, जब इन चावड़ी न्यायालयों पर सरकार रोक लगा दे। जब तक चावड़ी न्यायालयों पर यह प्रतिबंध नहीं लगाया जाता कि वे इस प्रकार हरिजनों के बारे में कोई निर्णय नहीं कर सकते, तब तक हरिजनों की नागरिक असुविधाओं को दूर करने के हमारे सभी प्रयास मिट्टी में मिलते रहेंगे। इससे पहले कि छुआछूत मिटाने के लिए तीन लाख रुपये खर्च किए जाएं, सरकार को कुछ जरूरी उपाय करने ही होंगे। उसे चावड़ी में हरिजनों पर हो रहे उत्पीड़न को बंद करना होगा। उसे हरिजनों को इस योग्य बनाना होगा कि वे इंसान के रूप में गर्व से अपना सिर उठा सकें। केरल में सार्वजनिक स्थानों से अब छुआछूत का सफाया हो गया है, क्योंकि देश के उस भाग से अब इन चावड़ी न्यायालयों का लोप हो गया है।