2. अस्पृश्य-उनकी संख्या - Page 27

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अंतिम जनगणना 1951 मेंं हुई। निम्नलिखित आंकड़े जनगणना आयुक्त द्वारा जारी विवरण से लिए गए हैं। जनगणना आयुक्त ने भारत में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या पांच करोड़ 13 लाख बताई है।

सन् 1951 की जनगणना में, जिसमें भारत की कुल जनसंख्या 35 करोड़ 67 लाख बताई गई है, एक लाख 35 हजार लोगों की गणना नहीं की जा सकी, जिनसे संबंधित रिकार्ड जालंधर के जनगणना अधिकारी के कार्यालय में आग लग जाने कारण नष्ट हो गया था।

पेंतीस करोड़ 67 लाख की कुल आबादी में से 29 करोड़ 49 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और छह करोड़ 18 लाख लोग शहरों में रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या चार करोड़ 62 लाख है, जब कि शहरों में उनकी जनसंख्या 51 लाख है।

कुल आबादी में गैर-कृषि कार्यों में लगे दस करोड़ 76 लाख लोगों में से एक करोड़ 32 लाख लोग अनुसूचित जातियों के हैं।

कुल आबादी में जिन लोगों या उनके आश्रितों के पास पूरी तरह या आंशिक रूप से अपनी-अपनी जमीनें हैं और जो खेती करते हैं, उनकी जनसंख्या 16 करोड़ 74 लाख है। इनमें से एक करोड़ 74 लाख लोग अनुसूचित जातियों के हैं। जिन लोगों के पास बिल्कुल भी या मुख्य रूप से अपनी-अपनी जमीनें नहीं हैं और जो खेती करते हैं, उनकी जनसंख्या पूरे भारत में तीन करोड़ 16 लाख है, इनमें से 56 लाख लोग अनुसूचित जातियों के हैं।

खेतिहर मजदूरों और उनके आश्रितों की कुल जनसंख्या पूरे भारत में चार करोड़ 48 लाख है। इनमें से एक करोड़ 48 लाख अनुसूचित जातियों के हैं।

गैर-कृषि वर्गों के आंकड़े इस प्रकार हैं-

कृषि को छोड़कर अन्य उत्पादन कार्यः कुल तीन करोड़ 77 लाख।

अनुसूचित जातियों के लोग 53

लाख।

वाणिज्य व्यवसाय ः कुल दो करोड़ 13 लाख।

अनुसूचित जातियों के लोग 9

लाख।

परिवहन ः कुल 56 लाख। अनुसूचित

जातियों के लोग छह लाख।