परिशिष्ट-२४
तक्षशीला विद्यापीठ
तक्षशीला शिक्षण-केंद्र की स्थापना बुद्ध पूर्व की हैं | यह स्थल वर्तमान पाकिस्तान मे पेशावर से २० मील दूरीपर स्थीत है । प्राचीन काल से ही यह स्थल विद्या का केद्र था । इस नगर को नागराजा तक्षक नें बसाया था । पिता के मृत्यु का बदला चुकाने के लिए जनमेजय ने यहाँ के नाग लोगों को तथा इस नगरी को नष्ट किया था |
बुद्ध-कालीन कोशल के राजा प्रसेनजित तथा मगध नरेंश बिंबिसार के राजवैद्य जीवक ने यहाँ ही शिक्षण लिया था | ware कनिष्क नें (समय इ. पूर्व १०० मै) यहाँ अनेंक बौद्ध स्थलों का एवं भवनों का निर्माण किया था | लेकिन विदेशी आक्रमणीं में यह स्थल बार बार विनष्ट होता था | पाँचवी सदी के आरंभ में यह पूर्णतः नष्ट हो गया था |
प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान पाँचवी सदी के आरंभ मे यहाँ आया था । उसके समय यह विद्या-केंद्र कुछ अच्छा था । लेकिन सातवी सदी में आये हुए हुएनत्सांग के समय यह खण्डहर जैसा था | बौद्ध-काल मे तक्षशीला का विकास भली-भाँती हुआ | पहले यहाँ हस्तिविद्या, चिकित्सा, आदि १८ शिल्पों की पढाई होती थी | बौद्ध काल मे यहाँ बौद्ध धम्म तथा दर्शन का अध्ययन होता था | एक समय यहाँ के महाविहार में भिक्षु कुमारलब्ध प्रमुख आचार्य थे ।*
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* : दीनबंधु, पृ. २९-३०.