Hindu Code Bill and its purpose—By Dharmadeo Vidyavachaspati in Hindi - Page 556

ANNEXURE II 1333

प्राप्त करने का अधिकार न रखेगी जब तक कि ऐसे बच्चे या सन्तान उत्तराधिकार शुरू होने के समय हिन्दू नहीं है।
ऐसे अन्य उद्धरण भी अनेक दिये जा सकते हैं जिनसे स्पष्ट है कि हिन्दू कोड बिल के निर्माताओं ने हिन्दुत्व की रक्षा का विशेष ध्यान रखा है तथा उन्हें हिन्दू धर्म से प्रेम है, यद्यपि उसमें सुधार की आवश्यकता को वे अवश्य अनुभव करते है जिसका उद्ेश्य भी वस्तुत: हिन्दू धर्म और जाति का उद्धार ही है।
इस विषय में माननीय डा- अम्बेडकर आदि से हुई बातचीत के आधार पर मैं निश्चय के साथ कह सकता हूँ कि वे हिंदू जाति को एकसूत्र में लाने और उसके संगठन को दृढ़ करने के लिए ही इस हिन्दू कोड बिल को प्रस्तुत कर रहे हैं जिसमें हिन्दुओं के अन्दर, धारा 2 में दी परिभाषा के अनुसार न केवल वे व्यक्ति आते हैं जो हिन्दू ध र्म के किसी भी स्वरूप या संप्रदाय को मानते हैं, किन्तु बौद्ध, जैन या सिक्ख धर्म के अनुयायी अथवा हिन्दू धर्म ग्रहण करने वाले व्यक्ति भी आते हैं । आदिवासी तथा अन्य भी इस परिभाषा में हिन्दुओं के अन्दर ही माने गये है।
विशाल दृष्टि से देखने पर निष्पक्षपात विचारकों को ऐसे एक सर्वसामान्य कोड का महत्व ज्ञात हो सकता है। भिन्न-भिन्न स्थानों और जातियों के रीति-रिवाजों ने विशाल हिन्दू को कैसे छिन्न-भिन्न कर रखा है यह बताने की अवश्यकता नहीं। इसलिये मैं चाहता हूँ कि झूठे नारे लगाने और इस बिल का पूर्ण विरोध करने की भावना को छोड़ कर लोग इस बिल की धाराओं का निष्पन्न होकर अध्ययन करें और तब ऐसे निर्देश अथवा संशोधन प्रस्तुत करें जिससे यह अधिक उपयोगी और लाभकारक बन सके। डा- अम्बेडकर तथा अन्य सदस्य ऐसे क्रियात्मक निर्देशों का स्वागत करने को उद्यत हैं।

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