Hindu Code Bill and its purpose—By Dharmadeo Vidyavachaspati in Hindi - Page 565

1342 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES

प्रस्तुत हिन्दू कोड बिल में भी इस प्रकार धोखे से कराये गये विवाह को अवैध माना गया है जिस का आधार उपर्युक्त वचन प्रतीत होते हैं।
(4) मनुस्मृति अ- का निम्नलिखित श्लोक भी इस सम्बन्ध में विशेष विचारणीय है:
"प्रोषितो धर्मकार्यार्थं, प्रतिक्ष्योष्टौ नर: समा: । विद्यार्थं षड्शो{र्थं वा, कामार्थं त्रींस्तु वत्सरान्।।
वन्धाष्टमे{धिवेद्याब्देदशमे तु मृतप्रजा । एकादशे स्त्रीजननीं सद्यस्त्वप्रियवादिनी।।"
(मनु अ- 9/76/81)
इस का अर्थ महर्षि दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश के चतुर्थ समुल्लास में इस प्रकार दिया है:
"पुरुष के लिए भी नियम है कि वन्धया हो तो आठवें (विवाह से 8 वर्ष तक स्त्री को गर्भ न रहे) सन्तान होकर मर जावे तो दशवें जब जब हो तब तब कन्या ही हो पुत्र न हो तो ग्यारहवें वर्ष तक और अप्रिय बोलने वाली हो तो सद्य: उस स्त्री को छोड़ के दूसरी स्त्री से नियोग कर के सन्तानोत्पत्ति कर लेवे। वैसे ही जो पुरुष अत्यन्त दुखदायक हो तो स्त्री को उचित है कि उस को छोड़ के दूसरे पुरुष से नियोग कर के सन्तानोत्पत्ति कर के उसी विवाहित पति के दायभागो सन्तान कर लेवे - - - इत्यादि सत्यार्थप्रकाश 27वीं वार पृ- 73
(5) मनुस्मृति 9/79 में लिखा है कि उन्मत्तं पतितं क्लीवम् अबीजं पाप रोगिणम्। न त्यागो{स्ति द्विषन्त्याश्च न च दायापवर्तनम्।
भावार्थ यह है कि यदि स्त्री ऐसे पति से द्वेष करती है जो उन्मत्त (पागल) है, धर्म का त्याग करके पतित हो गया है, नपुंसक तथा कोढ़ आदि भयंकर रोग से ग्रस्त है तो उसको विशेष दोष या दण्ड नहीं दिया जा सकता।
प्रस्तुत हिदू कोड बिल की धारा 30 में इसी प्रकार की शर्तें रखी गई हैं जैसे पाठक लेख के प्रारम्भ में उद्धृत वाक्यों में देख सकते हैं।
(6) कौटिल्य अर्थशास्त्र धर्मस्थीय अधिकरण 3 अध्याय 2 में चाणक्य ने लिखा है:µ
"नीचत्वं परदेशं वा प्रस्थितो राजकिल्विषी । प्राणाभिहन्ता पतित:, त्याज्य: क्लीवो{थवापति:।।"
"परस्परं द्वेषान्मोक्ष:" धर्मस्थीय अ- 3/4/19
अर्थात् पति यदि नीच और पतित हो गया हो, परदेश चला गया हो (और उसके विषय में कुछ ज्ञात न हो तो नियत अवधि तक मनु के अनुसार जो अधिक से अधिक 8 वर्ष है प्रतीक्षा कर के) धार्मिक राजा से द्रोहादि भयंकर अपराधी, हत्यारा अथवा नपुंसक हो तो वह त्याज्य है।
परस्पर द्वेष से पति पत्नी का त्याग या सम्बन्ध विच्छेद हो सकता है।
(2) यम स्मृति, कात्यायनादि से इसी प्रकार अन्य भी अनेक वचन उद्घृत किये जा सकते हैं कितु इस विषय पर विचार पहले ही लम्बा हो गया है अत: उन्हें उद्घृत करते