1348 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES
(हिन्दू कोड बिल पर विचार-6)
सम्पत्ति में स्ति्रयों के अधिकार
(पूर्वार्ध)
पं- धर्मदेव विद्यावाचस्पति
इस लेख में मैं उन धाराओं पर कुछ विचार करना चाहता हूं जिनका सम्बन्ध ‘स्ति्रयों के सम्पत्ति में अधिकार’ के साथ है। पुत्रियों के उस सम्पत्ति में अधिकार पर मैं अगले लेख में विचार करूंगा । ये दोनों विषय ही बडे़ विवादास्पद और कठिन है । मैने स्वयं अनेक दिनों तक इन विषयों पर शास्त्रीय तथा व्यावहारिक दृष्टि से विचार किया है और मुझे यह लिखने में संकोच नहीं कि अभी तक मैं सर्वथा निश्चित परिणाम पर पहुचने में पूर्णतया समर्थ नहीं हो सका तथापि अनेक विचारों को लेखबद्ध करना मुझे उचित प्रतीत होता है ताकि विचारशील जनता तथा विद्वन्मंडली उन पर गम्भीरता से विचार कर सके।
स्ति्रयों तथा विधवाओं का सम्पत्ति में अधिकार होना चाहिए या नहीं और यदि होना चाहिये तो वह सीमित हो अथवा पूर्ण जैसा कि इस बिल की धारा 91 एवं 93 में उल्लिखित है। इन धाराओं में कहा गया है :
स्त्री की सम्पत्ति के प्रकार-(1) इस कोड के अस्तित्व में सम्पूर्णतया आने के बाद किसी स्त्री द्वारा जो भी सम्पत्ति प्राप्त की जायेगी वह निश्चयात्मक वा निजी ( Absolute ) उसकी सम्पत्ति होगी।
अपवादµ(2) उपधारा (1) में उल्लिखित कोई बात किसी ऐसी सम्पत्ति पर लागू नहीं होगी जो कि स्त्री द्वारा बतौर दान के या किसी वसीयतनामे के अधीन प्राप्त की गई है और जहां दान एवं वसीयतनामे की शर्तें स्पष्टरूप या आनुषंगिक रूप में ऐसी सम्पत्ति के बारे में सीमित अधिकार प्रदान करती है बशर्तें कि उक्त आनुषंगिक आदेश का उद्भव उस स्त्री जाति के कारण ही नहीं होता।
व्याख्या-इस धारा में ‘सम्पत्ति में स्त्री द्वारा उपलब्ध चल और अचल उभय सम्पत्तियों का समावेश होगा, फिर चाहे यह प्राप्ति उसके विवाह से पहले या बाद हुई हो अथवा वैधव्यकाल के मध्य में हुई हो और चाहे वह उत्तराधिकारी के रूप में या किसी कार्य के फलस्वरूप अस्तित्व में आई हो या बंटवारे पर अथवा किसी सम्बन्धी या अन्य व्यक्ति द्वारा किसी दान से या अपनी चातुरी या प्रयत्न से या खरीद से या बहुकालबोधक अधिकार से किसी तरीके से प्राप्त हुई हो।
धारा 93-स्त्रीधन-पत्नी की अमानत इस कोड के आरम्भ होने के बाद किसी विवाह के संस्कार सम्पूर्ण होने की अवस्था में कोई भी ऐसा स्त्रीधन (डावरी या दहेज) जो कि उस विवाह प्रसंग पर अथवा उसकी किसी शर्त के रूप में या उसके सम्बन्ध में एक उपहार के रूप में दिया गया है वह उस स्त्री की सम्पत्ति समझा जायेगा जिसका कि इस प्रकार विवाहसंस्कार सम्पन्न किया गया है।