Hindu Code Bill and its purpose—By Dharmadeo Vidyavachaspati in Hindi - Page 581

1358 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES

कमेटी रिपोर्ट पृ- 130) महामहोपाध्याय चिन्नस्वामी शास्त्री आदि ने इलाहाबाद में अखिल भारतीय सनातन धर्म महासभा की ओर से साक्षी देते हुए यही कहा कि लड़कियों को, जो अपने पिता का श्राद्ध नहीं करती पैतृक सम्पत्ति में कोई भाग न मिलना चाहिए । (रावकमेटी रिपोर्ट पृ- 129) इस प्रकार की निस्सार युक्तियां जो पौराणिक विचारों पर आश्रित हैं कहां तक ठीक हैं यह विचार-शील सज्जन स्वयं निर्णय करें ।
पं- लक्ष्मण शास्त्री जोशी तर्कतीर्थ ने बहिन के भाई के साथ दायादि में भाग लेेने के विषय में निम्न वेदमन्त्र को धर्मकोष, व्यवहार काण्ड, उत्तरार्द्ध के पृ- 1415 में उद्धत किया है :
"एष ते रुद्र भाग: सह स्वस्त्रम्बिकया तं जुपस्व ।" (शुक्ल यजुर्वेद 3/57 कण्ब संहिता 7/6, मैत्रयणी संहिता 1/10/4, तैत्तिरीय संहिता 18/6/1, शतपथ ब्राह्मण 2/6/2/9)
यहां भी बहिन के भाई के साथ दायादि में भाग का स्पष्ट निर्देश है।
"अभ्रातेव पुंस एति प्रतीची गर्तारुगिव सनये धनानाम् ।" इस मंत्र में जिसकी निरुक्त
3/4 में व्याख्या की गई है अभ्रातृका कन्या का पैतृक सम्पत्ति को प्राप्त करने का स्पष्ट निर्देश है जिसका प्राय: सब स्मृतियों में भी समर्थन किया गया है जैसे कि अगले लेख में उद्धृत स्मृत्यादि वचनों से पाठकों को ज्ञात हो जायेगा ।

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