Hindu Code Bill and its purpose—By Dharmadeo Vidyavachaspati in Hindi - Page 585

1362 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES

(16) शुक्राचार्य ने अपनी स्मृति में जिसे शुक्रनीति के नाम से कहा जाता है बताया है कि समानभागा वै कार्या:, पुत्र: स्वस्य च वै स्ति्रय: । स्वाभागार्धहरा कन्या, दौहित्रस्तु तदर्थभाव्फ़ ।।
(शुक्रनीति 4, 5, 299)
अर्थात् पिता की सम्पत्ति में से पुत्रें और स्ति्रयों को समान 2 भाग मिलना चाहिए । कन्याओं को पुत्रें के भाग का आधा और घेषते को उसका भी आधा । इसी प्रकार अन्य भी बहुत से वचन स्मृतियों तथा अन्य ग्रन्थों में कन्याओं के दाय भाग में अधिकार के पाए जाते हैं किन्तु उनमें कन्या का भाग प्राय: पुत्र को चौथा हिस्सा माना गया है । इन वचनों से यह तो स्पष्ट है कि वह कन्याओं को पैतृक सम्पत्ति में से भाग देने की प्रथा धर्मविरुद्ध या मुसलमानी नहीं है । इस विषय पर अन्य दृष्टियों से विचार मैं अगले लेख में करूंगा ।

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