Hindu Code Bill and its purpose—By Dharmadeo Vidyavachaspati in Hindi - Page 589

1366 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES

(हिन्दू कोड बिल पर कुछ विचार-11)

पुत्रियों के दायभागाधिकार पर विमर्श

(उत्तरार्ध)
पं- धर्मदेव विद्यावाचस्पति
प्रस्तुत हिन्दू कोड बिल में वसीयतहीन मृत पिता की लड़कियों को लड़कों के बराबर देने का जो प्रस्ताव है उससे मैं सहमत नहीं हूं क्योंकि यदि लड़कियों को पिता की सम्पत्ति में से पुत्रें के समान भाग मिले, पति की सम्पत्ति में भी विवाहिता पत्नी का अधिकार हो, माता के स्त्रीधन में से अधिक भाग उसका हो तो वह न्याय संगत बात प्रतीत नहीं होती । सब कमेटी ने लड़कियों को बिना वसीयत मृत पिता की सम्पत्ति में पुत्रें से आधा भाग देने का प्रस्ताव किया था किन्तु प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के अनेक सदस्यों से प्रतीत होता है कि विरोध की प्रतिक्रिया के रूप में उसे लड़कों के बराबर देने का विचार प्रकट कर दिया जिसे हम बुद्धिमत्तापूर्ण व न्यायसम्मत नहीं कह सकते। वस्तुत: ऐसा करके उन्होंने हिन्दू कोड बिल के विरुद्ध आंदोलन को अनजाने प्रबल बनाने में सहायता दी। यदि वे इस लेखमाला में उद्धृत शास्त्रीय वचनों को दृष्टि में रखते हुए और मद्रास हाईकोर्ट मे भू- पू- सुयोग्य जज सर वेपा रामेशम् जैसे सुधार प्रेमी महानुभावों के वचनानुसार लड़कियों के पिता की सम्पत्ति में से लड़कों का चौथा भाग देने का प्रस्ताव भी रखते तो इस बिल का इतना विरोध न होता यह मुझे निश्चय है। अत: मेरा अब भी इस बिल के प्रस्तावक महोदय से सानुरोध निवेदन है कि वे लड़कियों को वसीयत हीन मृत पिता की सम्पत्ति में लड़कों के चौथे भाग देने का संशोधन स्वीकार कर लें। कोई निष्पक्ष व्यक्ति शास्त्रीय दृष्टि से भी इसका विरोध करने का साहस न करेगा और व्यावहारिका दृष्टि से भी विचार करने वालों को वह अधिक न्याय संगत प्रतीत होगा।
इस प्रस्ताव के विरोध में यह कहा जाता है कि लड़कियों का पैतृक सम्पत्ति में भाग होने से भाई बहिनों के झगड़े बढ़ जायेंगे और उनमें परस्पर प्रेम नही रहेगा । यह युक्ति कुछ भी प्रबल नहीं । इस युक्ति के अनुसार तो भाइयों में भी परस्पर विभाजन नहीं होना चाहिए। संसार की प्राय: सभी जातियों में लड़कियों को पिता की सम्पत्ति में भाग मिलता है उससे उनके अन्दर प्रेम नहीं रहता अथवा झगड़े बढ़ जाते हैं ऐसा नहीं कहा जा सकता। गोआ में भी एक ही सिविल कोड हिन्दुओं, इसाइयों, मुसलमानों सब पर लागू है जिसके अनुसार लड़कियों को लड़कों की तरह पैतृक सम्पत्ति में भाग मिलता है किन्तु जांच करने पर पता लगा है कि भाई बहिनों के झगड़ों के उदाहरण वहां नहीं के बराबर हैं । भाई बहिनों का प्रेम इसलिए न रहे कि बहिन को भी मृत पिता की सम्पत्ति में कुछ भाग (जो हमारे शास्त्रसम्मत और न्याय संगत प्रस्तावानुसार भाई के भाग का चौथाई) मिलता है तो ऐसे प्रेम को तो केवल स्वार्थमूलक ही कहना चाहिए। कलकत्ता हाईकोर्ट के एडवोकेट श्री- ए- सी- गुप्त और मद्रास के सर पी- एस- शिवस्वामी ऐÕयर ने हिन्दू ला कमेटी की सामने साक्षी देते हुए इस युक्ति के खण्डन में ठीक ही कहा था कि भाई