1368 DR. BABASAHEB AMBEDKAR : WRITINGS AND SPEECHES
(हिन्दू कोड बिल पर कुछ विचार-12)
संयुक्त परिवार प्रथा
पं- धर्मदेव विद्यावाचस्पति
प्रस्तुत हिन्दू कोड बिल में जिन धाराओं के विरुद्ध घोर असन्तोष प्रकट किया जा रहा है उन में से निम्न धाराएं भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
धारा 86 परिवार में जन्म सम्पत्ति पर अधिकार स्थापित नहीं करता । इस कोड के आरम्भ होने पर तथा उसके बाद, पूर्वज के जीवन काल के दरम्यान उसकी सम्पत्ति में हित रखने का दावा करने का अधिकार जो कि केवल इस तथ्य पर निर्धारित है कि दावेदार का जन्म उक्त पूर्वज के परिवार में हुआ था किसी भी अदालत में स्वीकृत नहीं होगा।
(87) संयुक्त आसामी का स्थान सम्मिलित आसामी के रूप में बदल जाएगा:µ
प्रस्तुत कोड के आरम्भ पर तथा उसके बाद कोई भी अदालत, संयुक्त परिवार की सम्पत्ति में हित रखने के किसी ऐसे अधिकार को मान्य नहीं करेगी जो कि उत्तराधिकार के नियम पर अवलम्बित हैं और समस्त व्यक्ति जिनके जिस दिन यह कोड कार्यान्वित हो जाएगा उस दिन कोई संयुक्त परिवार की सम्पत्ति है वह उक्त सम्पत्ति बतौर सम्मिलित आसामियों के (टेनेन्ट्स इन कामन) Tenants in common अपने पास रखते हैं ऐसा विचारा जायेगा। मानो कि कोड के आरम्भ की तिथि पर ऐसी सम्पत्ति के विषय में संयुक्त परिवार के समस्त सदस्यों के बीच बंटवारा हो गया था और उनमें से प्रत्येक व्यक्ति अपना भाग एकपरिपूर्ण स्वामी के रूप में अपने पास अलग रखते हैं । इत्यादि :µ
(88) हिन्दू पत्र के धार्मिक कर्तव्य का (पायस आब्लिगेशन) pious obligation का नियम खंडित किया जाता है (1) इस कोड के आरम्भ मे पश्चात् कोई भी अदालत सिवाय उसके जैसा कि उपधारा 2 में विनिहित किया गया है, किसी पुत्र, पौत्र, पौत्र के विरुद्ध, उसके पिता, पितामह, और प्रपितामह द्वारा लिये गये ऋण की वसूली के लिये और ऐसे किसी ऋण की अदायगी के सम्बन्ध में किसी सम्पत्ति को अधिकार में लेने के लिए इस आधार पर कि ऐसे किसी ऋण को चुका देगा उक्त पुत्र, पौत्र अथवा प्रपौत्र का धार्मिक कर्त्तव्य है, कानूनी कार्यवाही करने के अधिकार को स्वीकृत नहीं करेगी।
(2) इस कोड के प्रयोग में आने से पहिले यदि कोई ऋण लिया गया है तो उस हालत में उपधारा 1 में उल्लिखित कोई भी बात निम्नांकितों पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(अ) किसी भी लेनदार का पुत्र, पौत्र, और प्रपौत्र जैसे कि सूरत हो, के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही दायर करने का अधिकार या ऐसे किसी देन की वसूली के सम्बन्ध में किया गया किसी सम्पत्ति का स्वत्वार्पण या इन्तकाल ( Alienation ) और ऐसा कोई अधिकार या स्वत्वार्पण धार्मिक कर्त्तव्य के नियम के अधीन उसी प्रकार और उसी सीमा तक प्रयोग में लाया जायेगा जैसा कि यह कोड पास न होने की अवस्था में किया जाता।