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महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत 127

(ग) बंबई शहर की जनसंख्या में मराठी भाषियों का बहुमत नहीं है। ख्3,

(घ) गुजराती लोग बंबई के पुराने निवासी हैं। ख्4,

(ड.) बंबई ऐसा व्यापारिक केंद्र है, जिसका संबंध महाराष्ट्र के बाहर एक बड़े भू -

भाग से है इसलिए बंबई पर महाराष्ट्र का दावा ठीक नहीं है। बंबई तो सारे

भारत का है। ख्5,

(च) बंबई में रहने वाले गुजराती - भाषियों ने ही बंबई के व्यापार और उद्योग में

बढ़ोतरी की है। मराठी - भाषी या महाराष्ट्र के निवासी तो केवल क्लर्की या

कुलीगिरी करते हैं। व्यापार और उद्योग के मालिकों को अधिसंख्यक मेहनतकश

मराठी - भाषियों के राजनीतिक प्रभुत्व के तले रखना अनुचित होगा। ख्6,

(छ) महाराष्ट्र बंबई को अपने में केवल इसलिए मिलाना चाहता है, ताकि वह बंबई

की बेशी कमाई से अपना गुजर बसर कर सके। ख्7,

(ज) कोई भी बहुभाषी राज्य (एक भाषी राज्य की तुलना में) बेहतर होता है।

बहुभाषी होना अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता को चोट पहुंचाने वाला नहीं माना

जाएगा। ख्8,

(झ) प्रांतों का पुनर्गठन तार्किक आधार पर किया जाए न कि राष्ट्रीय आधार

पर। ख्9,

सबूत का दायित्व

  1. इन बिन्दुओं की जांच से यह स्पष्ट हो जाता है कि बिंदु (1) और (2) इस अर्थ में प्राथमिक हैं कि इनसे हमें यह तय करने में सहायता मिलती है कि सबूत का भार किनके कंधों पर है। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि बंबई महाराष्ट्र का हिस्सा है, तो फिर इसे महाराष्ट्र से अलग करने के लिए सबूत देने का दायित्व अलगाववादियों पर आ जाता है न कि उन पर, जो इसे महाराष्ट्र का हिस्सा मानने का दावा करते हैं। इसलिए मैं पहले इन्हीं दो बिंदुओं का विवेचन करूंगा।

3 प्रो. सी. एन. वकील, फ्री प्रेस जरनल, 21 सितम्बर, 1948

4 प्रो. घीवाला, फ्री प्रेस जरनल, 6 सितम्बर, 1948

5 प्रो. सी. एन. वकील, फ्री प्रेस जरनल, 11 सितम्बर, 1948

6 प्रो. सी. एन. वकील, बोंबे क्रोनिकल

7 प्रो. सी. एन. वकील, इंडिया मर्चेंट्स चेम्बर की बैठक में

8 प्रो. दांतवाला, फ्री प्रेस जरनल, 1 सितम्बर, 1948

9 प्रो. घीवाला, फ्री प्रेस जरनल, 11 सितम्बर, 1948